बांग्लादेश क्रिकेट इन दिनों भारी उथल पुथल से गुजर रहा है। बाहर भारत और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद से टकराव चल रहा है और भीतर अपने ही खिलाड़ियों ने मोर्चा खोल दिया है। हालात इतने बिगड़ गए कि देश की बड़ी टी20 लीग तक रोकनी पड़ी। जिस बोर्ड ने सख्त फैसलों से दुनिया को चौंकाया था अब वही बोर्ड अपने खिलाड़ियों के विरोध से घिर गया है। इस पूरे विवाद के केंद्र में एक ही नाम बार बार सामने आ रहा है और वही नाम अब सबसे बड़ी परेशानी बन गया है।
एक बयान और भड़क उठा विवाद
बात तब बिगड़ी जब बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने बयान दिया कि बोर्ड खिलाड़ियों पर करोड़ों टका खर्च करता है और खिलाड़ियों को यह पैसा लौटाना चाहिए। यह बयान खिलाड़ियों को अपमानजनक लगा। देखते ही देखते खिलाड़ियों में नाराजगी फैल गई। खिलाड़ियों ने तय किया कि अब चुप नहीं बैठेंगे। विरोध के तौर पर उन्होंने देश की टी20 लीग का बहिष्कार शुरू कर दिया जिससे दो मुकाबले टालने पड़े।
खिलाड़ियों का संगठित विरोध
इस विरोध की अगुवाई खिलाड़ियों के कल्याण संगठन ने की। टीम के लगभग सभी सीनियर खिलाड़ी इस आंदोलन में शामिल हो गए। खास बात यह रही कि बाएं हाथ के तेज गेंदबाज मुस्तफिजुर रहमान भी इस विरोध में खुलकर सामने आ गए। यह वही खिलाड़ी हैं जिनके चलते बोर्ड पहले ही भारत और अंतरराष्ट्रीय मंच पर सख्त रुख अपना चुका था। ऐसे में उनका बोर्ड के खिलाफ खड़ा होना अधिकारियों के लिए बड़ा झटका बन गया।
भारत से टकराव की पृष्ठभूमि
कुछ समय पहले भारतीय क्रिकेट बोर्ड ने मुस्तफिजुर रहमान को देश की पेशेवर लीग से बाहर कर दिया था। इसके बाद बांग्लादेश बोर्ड ने टी20 विश्व कप के लिए भारत आने से इनकार कर दिया और मुकाबलों के स्थल बदलने की मांग रख दी। यह फैसला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया। तभी से बोर्ड लगातार दबाव में है और अब अंदरूनी विद्रोह ने हालात और बिगाड़ दिए हैं।
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लीग ठप और साख पर सवाल
खिलाड़ियों के बहिष्कार का सीधा असर टी20 लीग पर पड़ा। मैच टलने से दर्शक नाराज हुए और बोर्ड की साख पर सवाल उठने लगे। क्रिकेट जानकार मान रहे हैं कि अगर यह विवाद जल्द नहीं सुलझा तो इसका असर आने वाले अंतरराष्ट्रीय दौरों और टूर्नामेंटों पर भी पड़ सकता है। खिलाड़ी साफ संदेश दे चुके हैं कि सम्मान के बिना मैदान पर उतरना मुश्किल है।
आगे क्या रास्ता बचेगा
अब बांग्लादेश क्रिकेट एक नाजुक मोड़ पर खड़ा है। बाहर अंतरराष्ट्रीय दबाव है और भीतर खिलाड़ियों का गुस्सा। जिस मुस्तफिजुर को बोर्ड ने अपनी रणनीति का केंद्र बनाया था वही अब विरोध की आवाज बन चुके हैं। सवाल यही है कि क्या बोर्ड झुकेगा या टकराव और बढ़ेगा। आने वाले दिन तय करेंगे कि बांग्लादेश क्रिकेट संभलेगा या यह संकट और गहराएगा।