बांग्लादेश आज अपने राजनीतिक इतिहास के एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ा है। लंबे समय तक सत्ता में रही अवामी लीग के प्रभाव में गिरावट आने के बाद देश की बागडोर अब नोबेल शांति पुरस्कार विजेता डॉ. मोहम्मद यूनुस के हाथों में आ चुकी है। मुख्य सलाहकार के रूप में नियुक्त होते ही उन्होंने टूट चुकी प्रशासनिक व्यवस्था को सुधारने और ऐसे चुनाव करवाने के संकल्प का इरादा जताया, जो आने वाले वर्षों में देश का भविष्य निर्धारित करेगा। लेकिन चुनाव में तारिक रहमान की निर्णायक जीत के साथ ही अब यूनुस को अपनी जिम्मेदारी छोड़नी होगी और बांग्लादेश एक नए राष्ट्रीय निर्माण की दिशा में अग्रसर होगा।
यूनुस का राजनीतिक और सामाजिक सफर
डॉ. मोहम्मद यूनुस का नाम विश्व स्तर पर विशेष रूप से माइक्रोक्रेडिट अर्थात् गरीबों को छोटे कर्ज उपलब्ध कराने की दिशा में अपनी दूरदर्शी सोच के लिए प्रसिद्ध है। 1974 के भयावह अकाल के बाद उन्होंने महसूस किया कि केवल शिक्षा या दान-पुनर्प्राप्ति पर्याप्त नहीं है; गरीबों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए वित्तीय सहायता भी आवश्यक है। इसी सोच के साथ उन्होंने ग्रामीण बैंक की नींव रखी, जिसने वैश्विक स्तर पर सामाजिक अर्थव्यवस्था को एक नई दिशा दी। एक केयरटेकर प्रधानमंत्री के रूप में काम करते हुए यूनुस ने देश की सरकारी मशीनरी में व्याप्त विफलताओं को बड़े स्तर पर देखा और सार्वजनिक रूप से कहा कि बांग्लादेश को तानाशाही की राह पर वापस नहीं जाना चाहिए। अगस्त 2024 में जब वे निर्वासन से वापस लौटे तो उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि उन्हें एक पूर्णतया बिखरी हुई व्यवस्था मिली है।
सुधार और चुनाव की दिशा
यूनुस सरकार के तहत यह स्पष्ट किया गया कि केवल चुनाव कराना ही स्थिति का समाधान नहीं है; चुनाव के बाद देश को स्थिरता, पारदर्शिता और लोकतांत्रिक मूल्यों पर मजबूती से आगे बढ़ाना भी आवश्यक है। इसी सोच के तहत ‘सुधार चार्टर’ तैयार किया गया, जिसका लक्ष्य प्रणालीगत सुधार और नैतिक मानदंडों का पुनर्निर्माण था। 19 जनवरी को देश के सामने अपना संबोधन पेश करते हुए यूनुस ने जनमत संग्रह के लिए समर्थन की अपील की और कहा कि यदि लोग “हां” में मतदान करेंगे तो यह नए बांग्लादेश की दिशा खोल सकता है।
राजनीतिक तनाव और बदलते समीकरण
बांग्लादेश की वर्तमान राजनीतिक स्थिति अत्यंत संवेदनशील बनी हुई है। अवामी लीग को वर्तमान चुनाव प्रक्रिया में भाग लेने से रोका गया है और पार्टी की प्रमुख शेख हसीना फिलहाल भारत में निर्वासन में हैं, उन पर गंभीर आरोपों का मामला भी चल रहा है। पिछले साल नवंबर में अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण ने अगस्त 2024 के प्रदर्शनों के दौरान बल का अनुचित उपयोग करने के आरोप में उन्हें मौत की सजा सुनाई, साथ ही नागरिकों के खिलाफ अन्य अपराधों के लिए अतिरिक्त उम्रकैद भी मिली है। दूसरी ओर बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के नेता तारिक रहमान दिसंबर में लंदन से देश वापस लौटे और प्रधानमंत्री पद के प्रमुख दावेदार बनकर उभरे। बीएनपी ने अपने मुख्य प्रतिद्वंद्वी जमात-ए-इस्लामी को पीछे छोड़ते हुए निर्णायक जीत हासिल की। हालांकि इसी बीच देश में सांप्रदायिक तनाव और हिंसा जैसी घटनाओं ने माहौल को और अधिक जटिल कर दिया है, जिनमें दिसंबर में छात्र नेता शरीफ उस्मान हादी की हत्या भी शामिल है।
अवामी लीग का विरोध और आगामी संकट
अवामी लीग ने यूनुस सरकार द्वारा घोषित चुनावी प्रक्रिया को पूरी तरह अस्वीकार कर दिया है। पार्टी ने 12 फरवरी 2026 को निर्धारित चुनाव की तारीख को अवैध बताया और मौजूदा प्रशासन की प्रक्रिया को निष्पक्ष नहीं मानते हुए कड़ी आलोचना की है। इसके अलावा हसीना सरकार के पतन के बाद भारत के साथ बांग्लादेश के रिश्तों में भी स्पष्ट खटास नजर आ रही है, जो क्षेत्रीय अंतर्संबंधों के लिए नए राजनीतिक तनाव का संकेत है।