बांग्लादेश में चुनाव को लेकर राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। देश में हिंसा और राजनीतिक उथल-पुथल के बीच चुनावी तैयारी भी जोरशोर से चल रही है। वहीं, देश की अंतरिम यूनुस सरकार ने जनजागरूक अभियान शुरू कर दिया है। यूनुस सरकार आगामी जनमत संग्रह (रेफरेंडम) को लेकर अपना अभियान चला रही है। मुहम्मद यूनुस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट में बताया कि अंतरिम सरकार के चीफ एडवाइजर का रेफरेंडम में हां वोट के लिए सपोर्ट बांग्लादेश में डेमोक्रेटिक नॉर्म्स के हिसाब से क्यों है?
उन्होंने लिखा, हाल ही में चिंता जताई है कि अंतरिम सरकार और मुहम्मद यूनुस का बांग्लादेश के इंस्टीट्यूशनल सुधारों पर आने वाले रेफरेंडम में हां वोट के लिए खुला समर्थन, अंतरिम सरकार की उम्मीदों के हिसाब से नहीं हो सकता है। इन चिंताओं पर सम्मान के साथ विचार किया जाना चाहिए। हालांकि, जब बांग्लादेश के खास राजनीतिक कॉन्टेक्स्ट, अंतरिम सरकार के मैंडेट और तुलनात्मक अंतरराष्ट्रीय अभ्यास को ध्यान में रखकर देखा जाता है, तो ऐसी आलोचना बारीकी से जांच करने पर भी टिक नहीं पाती है।
सुधारों का एक भरोसेमंद फ्रेमवर्क देना रहा
मुहम्मद यूनुस ने कहा, बांग्लादेश के मौजूदा बदलाव के समय में, चुप्पी उदासीनता नहीं, बल्कि नेतृत्व की नाकामी होगी। अंतरिम सरकार का काम सुधार करना है, न कि प्रक्रिया को कम करना। बांग्लादेश की अंतरिम सरकार सिर्फ रोजाना के सरकारी कामों को चलाने या एक पैसिव चुनावी केयरटेकर के तौर पर काम करने के लिए नहीं बनाई गई थी। अंतरिम सरकार का काम राज्य को स्थिर करना, लोकतांत्रिक दायित्व बहाल करना, और चुनी हुई सरकार को अधिकार वापस देने से पहले सुधारों का एक भरोसेमंद फ्रेमवर्क देना रहा है।
मकसद सीधे पॉपुलर जजमेंट को आसान बनाना है
उन्होंने आगे कहा कि जैसा दूसरे देशों में होता है, बांग्लादेश में रेफरेंडम टेक्नोक्रेटिक एक्सरसाइज के तौर पर नहीं बनाए गए हैं। इनका मकसद सीधे पॉपुलर जजमेंट को आसान बनाना है। यह जजमेंट तब और मजबूत होता है जब वोटरों को शासन के लिए जिम्मेदार लोगों की तरफ से साफ तर्क दिए जाते हैं।
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