बांग्लादेश में कानून-व्यवस्था और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। छह दिनों के भीतर दो हिन्दुओं की लिंचिंग की घटनाओं ने पूरे देश को झकझोर दिया है। एक तरफ बीएनपी नेता तारिक रहमान लोकतांत्रिक और सेकुलर बांग्लादेश की बात कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही।
6 दिनों में दो हिन्दुओं की हत्या, देश में डर का माहौल
24 दिसंबर की रात बांग्लादेश के राजबाड़ी जिले के पांग्शा उपजिला में हिन्दू युवक अमृत मंडल की भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। गंभीर हालत में अस्पताल पहुंचाए गए अमृत की कुछ ही घंटों बाद मौत हो गई। इससे छह दिन पहले 18 दिसंबर को दीपू चंद्र दास की हत्या हुई थी। लगातार हो रही इन घटनाओं से हिन्दू समुदाय में दहशत फैल गई है।
पुलिस की दलीलें, लेकिन सवाल कायम
पुलिस ने अमृत मंडल की हत्या को सांप्रदायिक घटना मानने से इनकार किया है। पुलिस का कहना है कि मृतक का आपराधिक इतिहास था और मामला स्थानीय गैंगवार से जुड़ा है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी परिस्थिति में भीड़ को कानून हाथ में लेने की छूट नहीं दी जा सकती।
तारिक रहमान के भाषण और जमीनी हकीकत
25 दिसंबर को 17 साल बाद बांग्लादेश लौटे बीएनपी नेता तारिक रहमान ने ढाका में अपने भाषण में कानून-व्यवस्था बनाए रखने और सभी समुदायों की सुरक्षा की बात कही। उन्होंने बांग्लादेश को मुसलमानों, हिन्दुओं, बौद्धों और ईसाइयों का साझा देश बताया। लेकिन जमीनी हकीकत उनके बयानों से उलट नजर आ रही है।
चटगांव में अल्पसंख्यकों पर हमले
चटगांव के राउज़ान इलाके में हाल के दिनों में हिन्दू परिवारों के घरों में आगजनी की कई घटनाएं सामने आई हैं। हमलावरों ने देर रात घरों के दरवाजे बाहर से बंद कर आग लगा दी। किसी तरह जान बचाकर भागे परिवारों ने प्रशासन पर लापरवाही के आरोप लगाए हैं।