पश्चिम बंगाल चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की बड़ी जीत सिर्फ पूर्वी भारत की राजनीति और शासन को ही नहीं बदल सकती, बल्कि भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में भी एक नया और ज्यादा सकारात्मक दौर शुरू कर सकती है। ढाका के स्थानीय मीडिया में इस बात को लेकर चर्चा हो रही है।
मजबूत और सफल साझेदारियों में से एक
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, भारत और बांग्लादेश के बीच लंबे समय से दक्षिण एशिया की सबसे मजबूत और सफल साझेदारियों में से एक रही है। सुरक्षा, व्यापार, ऊर्जा और कनेक्टिविटी जैसे कई क्षेत्रों में दोनों देशों ने मिलकर काम किया है, जो व्यावहारिक कूटनीति का एक अच्छा उदाहरण माना जाता है। हालांकि, कुछ पुराने और अनसुलझे मुद्दों की वजह से समय-समय पर रिश्तों में तनाव भी आया है। इनमें सबसे बड़ा मुद्दा तीस्ता नदी के पानी बंटवारे का समझौता है, जो लंबे समय से अटका हुआ है।
पुराने मुद्दों पर ज्यादा तालमेल
रिपोर्ट में कहा गया है कि अब कोलकाता में भाजपा की सरकार बनने और केंद्र में पहले से एनडीए की सरकार होने से इन पुराने मुद्दों को ज्यादा तालमेल और तेजी के साथ हल करने का अच्छा मौका मिल सकता है।
किसान इसकी पानी पर निर्भर
रिपोर्ट में बताया गया कि तीस्ता नदी हिमालय से निकलती है, फिर सिक्किम और पश्चिम बंगाल से होकर बांग्लादेश में जाती है। बांग्लादेश के उत्तरी इलाकों में लाखों किसान इसकी पानी पर निर्भर हैं।
पानी बंटवारे के समझौते के काफी करीब
भारत और बांग्लादेश 2011 में पानी बंटवारे के समझौते के काफी करीब पहुंच गए थे, लेकिन उस समय पश्चिम बंगाल की राज्य सरकार ने स्थानीय पानी की जरूरतों का हवाला देते हुए आपत्ति जताई थी, जिसके कारण समझौता नहीं हो पाया।
रिश्तों को और मजबूत करने का मौका
तब से तीस्ता का मुद्दा दोनों देशों के अच्छे रिश्तों के बीच अधूरे काम की तरह देखा जाता है। रिपोर्ट में कहा गया कि पश्चिम बंगाल में भाजपा की जीत से राज्य और केंद्र दोनों जगह एक ही राजनीतिक नेतृत्व होने की स्थिति बनी है। इससे दोनों देशों के बीच पुराने मुद्दों को सुलझाने और रिश्तों को और मजबूत करने का मौका मिल सकता है।