मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को झकझोर दिया है। तेल और गैस की कीमतों में तेजी से उछाल ने आयात पर निर्भर देशों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। इसी संकट के बीच बांग्लादेश ने अमेरिका से खास अनुमति मांगते हुए रूस से डीजल खरीदने की इच्छा जताई है। उसने भारत का उदाहरण देते हुए समान छूट की अपील की है।
ऊर्जा संकट में फंसा बांग्लादेश
बांग्लादेश इस समय गंभीर ऊर्जा संकट से जूझ रहा है। लगभग 17.5 करोड़ की आबादी वाला यह देश अपनी 95% ऊर्जा जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है। वैश्विक बाजार में अस्थिरता और तेल की कीमतों में उछाल ने इसकी अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ा दिया है।
अमेरिका से विशेष छूट की मांग
संयुक्त राज्य अमेरिका से बांग्लादेश ने औपचारिक रूप से अनुरोध किया है कि उसे रूस से डीजल खरीदने के लिए अस्थायी छूट दी जाए। बांग्लादेश का कहना है कि उसे कम से कम दो महीने की जरूरत के लिए करीब 6 लाख मीट्रिक टन डीजल आयात करना है, जो उसके ऊर्जा संकट को कुछ हद तक कम कर सकता है।
भारत का दिया उदाहरण
भारत को हाल ही में अमेरिका द्वारा रूसी तेल खरीदने के लिए अस्थायी राहत दी गई थी। इसी का हवाला देते हुए बांग्लादेश ने भी समान व्यवस्था की मांग की है। उसका तर्क है कि क्षेत्रीय संतुलन और ऊर्जा स्थिरता के लिए उसे भी यह सुविधा मिलनी चाहिए।
युद्ध से प्रभावित वैश्विक सप्लाई
ईरान के आसपास बढ़ते तनाव और समुद्री मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य पर बाधाओं ने तेल सप्लाई को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। इस मार्ग से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है, और इसमें रुकावट आने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें लगातार बढ़ रही हैं।
वैकल्पिक स्रोतों की तलाश जारी
बांग्लादेश सरकार फिलहाल कई देशों से तेल आयात के विकल्प तलाश रही है। साथ ही भारत की रिफाइनरियों से भी डीजल खरीद बढ़ाई जा रही है। हालांकि, विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर जल्द स्थायी समाधान नहीं मिला, तो देश में ईंधन संकट और गहरा सकता है।