
बांग्लादेश की पूर्व पीएम शेख हसीना ने मुहम्मद यूनुस की अगुवाई वाली अंतरिम सरकार की आलोचना की। उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (आईसीटी) की ओर से सेना अधिकारियों के खिलाफ केस चलाने की कड़ी निंदा की है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, आईसीटी ने बुधवार को अवामी लीग सरकार के कार्यकाल के दौरान लोगों को गायब किए जाने, हत्याओं और मानवता के विरुद्ध अन्य अपराधों के तीन अलग-अलग केस में 15 सैन्य अधिकारियों को जेल भेजने का आदेश दिया।
युद्ध अपराधियों पर केस चलाया
पूर्व प्रधानमंत्री की ओर से जारी एक बयान में कहा गया, 'बांग्लादेश एक अजीब और अकल्पनीय घटना का गवाह बना है। आईसीटी ने कभी हमारे महान मुक्ति संग्राम के दौरान मानवता के विरुद्ध अपराधों के लिए जिम्मेदार युद्ध अपराधियों पर केस नहीं चलाया। उसका उपयोग हमारे सशस्त्र बलों के देशभक्त सदस्यों, राष्ट्र की स्वतंत्रता और संप्रभुता के सजग प्रहरी पर मामला चलाने के लिए किया जा रहा है।
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हास्यास्पद मुकदमों को रोका जाना चाहिए
बांग्लादेश अवामी लीग पार्टी के सोशल मीडिया अकाउंट पर पोस्ट किया। शेख हसीना ने जोर देकर कहा कि अवैध आईसीटी और उसके सभी हास्यास्पद मुकदमों को रोकाना ही होगा। राजनीतिक कैदियों को बिना शर्त रिहा करना चाहिए। यूनुस शासन की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा, हत्यारे और फासीवादी यूनुस के नाजायज और मानवाधिकारों का उल्लंघन करने वाले शासन में बांग्लादेश में कानून का किसी तरह का राज नहीं है। पूरा देश आतंकवादियों और चरमपंथियों की शरणस्थली बन चुका है। पूर्व पीएम हसीना का कहना है कि बीते वर्ष जुलाई-अगस्त में छात्र आंदोलन की आड़ में एक सुनियोजित साजिश रचि गई है। यहां पर छात्रों, नागरिकों, पुलिस अधिकारियों, अवामी लीग के नेताओं और कार्यकर्ताओं, अल्पसंख्यक समुदायों के सदस्यों, पत्रकारों, वकीलों और सांस्कृतिक कार्यकर्ताओं की बेरहमी से मार दिया गया।