बांग्लादेश महिला क्रिकेट टीम इन दिनों एक बड़े विवाद के केंद्र में है. टीम की अनुभवी तेज गेंदबाज जहानारा आलम ने अपनी ही कप्तान निगार सुल्ताना जोती पर बेहद गंभीर आरोप लगाकर हंगामा खड़ा कर दिया है. जहानारा ने खुलकर कहा कि टीम में जूनियर खिलाड़ियों को डांटा नहीं सीधे थप्पड़ मारा जाता है. उन्होंने दावा किया कि हाल ही में हुए विश्व कप के दौरान कई युवा खिलाड़ियों ने उनसे रो-रोकर कहा कि दीदी, गलती नहीं करूंगी… फिर थप्पड़ पड़ेगा. यहां तक कि उन्होंने ये भी कहा कि दुबई दौरे पर निगार सुल्ताना ने एक जूनियर को कमरे में बुलाकर थप्पड़ जड़ दिया था. उनके इन आरोपों ने बांग्लादेश क्रिकेट में हलचल मचा दी है.
मानसिक दबाव का आरोप
जहानारा ने सिर्फ थप्पड़ का मुद्दा नहीं उठाया, बल्कि टीम के पूरे माहौल को टॉक्सिक करार दिया. उन्होंने कहा कि 2024 T20 विश्व कप के दौरान उन्हें मानसिक स्वास्थ्य के गंभीर संकट से गुजरना पड़ा, जिसकी वजह टीम के अंदर का दबाव था. उनका दावा है कि टीम में दो-तीन खिलाड़ियों को ज्यादा सुविधा और तवज्जो मिलती है, जबकि बाकी खिलाड़ियों को लगातार अनदेखा किया जाता है. जहानारा के अनुसार यह माहौल इतना खराब हो चुका है कि टीम की लगभग हर खिलाड़ी किसी न किसी तरह की निजी समस्या झेल रही है. उन्होंने आरोप लगाया कि 2021 के बाद से ही सीनियर खिलाड़ियों को एक-एक कर बाहर करने की “साइलेंट पॉलिसी” चलाई गई, जिसमें वो खुद भी शिकार बनीं.
BCB ने कहा- झूठे, मनगढ़ंत आरोप
जहानारा के आरोपों के बाद बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) ने तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए सभी आरोपों को झूठ, अफवाह और दुर्भावना” करार दिया। बोर्ड ने बयान जारी किया कि टीम शानदार प्रदर्शन कर रही है, ऐसे वक्त में इस तरह के आरोप बेहद निराशाजनक और असत्य हैं. बोर्ड ने साफ कहा कि कप्तान निगार सुल्ताना के खिलाफ किसी भी तरह के दुर्व्यवहार या मारपीट का कोई सबूत मौजूद नहीं है. BCB ने जहानारा पर सीधा तंज कसते हुए कहा कि वो अब टीम का हिस्सा नहीं हैं, इसलिए ये बयान केवल भ्रम फैलाने का तरीका है. बोर्ड ने ये भी साफ कर दिया कि किसी जांच की जरूरत नहीं है टीम पूरी तरह एकजुट है.
कप्तान निगार सुल्ताना की चुप्पी
सबसे दिलचस्प बात यह है कि आरोपों की आंधी के बाद भी कप्तान निगार सुल्ताना ने अब तक एक शब्द नहीं बोला है. उनकी चुप्पी ने इस विवाद को और गंभीर बना दिया है. जहानारा और निगार के बीच यह विवाद सिर्फ दो खिलाड़ियों का टकराव नहीं, बल्कि बांग्लादेश महिला क्रिकेट टीम में लंबे समय से पनप रहे मतभेदों की ओर इशारा करता है। सवाल उठ रहा है कि क्या टीम दो गुटों में बंट चुकी है? क्या जूनियर्स वाकई डर के माहौल में खेल रहे हैं? और क्या BCB इस मुद्दे को दबाने की कोशिश कर रहा है? फिलहाल पूरा मामला बांग्लादेश क्रिकेट में भूचाल जैसा है. अब निगार सुल्ताना या बोर्ड आगे क्या कदम उठाते हैं पूरा क्रिकेट जगत उसी पर नजर बनाए हुए है.