उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में एक साथ दो अलग-अलग इलाकों में बुलडोजर कार्रवाई की आशंका ने लोगों में डर का माहौल बना दिया है। एक तरफ ग्रामीण क्षेत्र है तो दूसरी तरफ शहर का व्यस्त बाजार। अचानक लगाए गए लाल निशानों ने सैकड़ों परिवारों और व्यापारियों की नींद उड़ा दी है। लोगों को समझ नहीं आ रहा कि आगे क्या होने वाला है और उनका आशियाना या रोज़गार बचेगा भी या नहीं।
सीबी गंज क्षेत्र में 300 मकानों पर खतरा
पहला मामला थाना सीबी गंज क्षेत्र का है, जहां करीब 300 मकानों और दुकानों पर लाल निशान लगाए गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अचानक बिना किसी स्पष्ट जानकारी के यह निशान लगाए गए, जिससे पूरे इलाके में दहशत फैल गई। लोगों को डर है कि अगर यहां बुलडोजर चला तो पूरा का पूरा गांव ही मलबे में तब्दील हो सकता है। कई परिवार दशकों से यहां रह रहे हैं और उनके पास जमीन से जुड़े पुराने कागजात भी मौजूद हैं।
नगर क्षेत्र की पुरानी दुकानों पर संकट
दूसरा मामला नगर क्षेत्र के कोतवाली इलाके का है। यहां करीब 60 साल पुरानी 50 से ज्यादा दुकानों पर बुलडोजर का खतरा मंडरा रहा है। बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री ग्रेड योजना के तहत सड़क चौड़ीकरण का काम होना है। योजना की शुरुआत से पहले दुकानों के आगे लाल निशान लगा दिए गए हैं। व्यापारियों को डर है कि उनकी दुकानों का बड़ा हिस्सा अतिक्रमण बताकर गिरा दिया जाएगा।
नगर निगम का सख्त रुख
नगर निगम के अभियंता राजीव कुमार राठी ने साफ कहा है कि यह अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई है। उन्होंने बताया कि अभी सिर्फ निशान लगाए गए हैं और आगे कार्रवाई की जाएगी। उनका कहना है कि किसी भी तरह का मुआवजा नहीं दिया जाएगा। अगर लोग खुद अतिक्रमण नहीं हटाते हैं, तो नगर निगम बुलडोजर चलाएगा और उसका खर्च भी संबंधित लोगों से वसूला जाएगा। अधिकारियों के इस बयान से लोगों की चिंता और बढ़ गई है।
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स्थानीय लोगों ने उठाए सवाल
स्थानीय निवासी लालमन सिंह का कहना है कि यह जमीन ग्राम सभा की है और उनके पास 1955 की रसीदें मौजूद हैं। वे पिछले 30-35 साल से यहां रह रहे हैं। उनका आरोप है कि बिना कोई जानकारी दिए घरों पर निशान लगाए जा रहे हैं। वहीं दुकानदार संजीव अग्रवाल ने कहा कि नाप गलत तरीके से की जा रही है, जिससे अधिकांश दुकानें खत्म हो जाएंगी। व्यापारी विकास के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन वे चाहते हैं कि काम सही और निष्पक्ष तरीके से हो।
दहशत और असमंजस का माहौल
फिलहाल बरेली के दोनों इलाकों में डर और असमंजस का माहौल है। लोग विकास चाहते हैं, लेकिन बिना सुने-समझे की जा रही कार्रवाई से नाराज हैं। व्यापारियों और स्थानीय लोगों ने अधिकारियों से बातचीत की है और समाधान का भरोसा भी मिला है, लेकिन बुलडोजर की आशंका अभी भी लोगों के सिर पर मंडरा रही है। अब सबकी नजर प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हुई है।