
बरेली हिंसा के बाद CM योगी के सख्त आदेशों का असर साफ दिखाई दे रहा है। जिसके तहत मौलाना तौकीर रज़ा समेत 8 लोगों की गिरफ्तारी और कई FIR दर्ज की गई है। पुलिस की इस कार्रवाई से यह संदेश गया है कि कानून व्यवस्था बिगाड़ने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि अब हर उपद्रवी की पहचान कर उसे जेल भेजा जाएगा।
IMC प्रमुख मौलाना तौकीर रज़ा को किया अरेस्ट
दरअसल उत्तर प्रदेश के बरेली में शुक्रवार को हुई हिंसा का बड़ा असर सीएम योगी के सख्त निर्देशों के बाद अब सामने आ रहा है। पुलिस ने इत्तेहाद-ए-मिल्लत काउंसिल (IMC) प्रमुख मौलाना तौकीर रज़ा को गिरफ्तार कर लिया है। उन्हें न्यायालय में पेश करने के बाद 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। उनके साथ सात अन्य लोगों को भी जेल भेजा गया है।
जुमे की नमाज़ के बाद भड़का बरेली
बता दें कि इस घटना की शुरुआत जुमे की नमाज के बाद हुई, जब अल हजरत दरगाह के पास कुछ लोग "आई लव मोहम्मद" के पोस्टर लेकर उतर आए। इस प्रदर्शन को प्रशासन से मंजूरी नहीं मिली थी, इसके बावजूद भीड़ इकट्ठा हो गई और देखते ही देखते माहौल हिंसक हो गया। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पत्थरबाजी शुरू कर दी, जिसके बाद पुलिस ने लाठीचार्ज कर स्थिति संभालने की कोशिश की।
मौलाना तौकीर रज़ा पर सात FIR
वहीं इस हिंसा में अब तक कुल 10 FIR दर्ज की जा चुकी हैं। इनमें से कोतवाली थाने में 5, बरादरी में 2, प्रेमनगर में 1 और कैंट थाने में 1 मुकदमा दर्ज हुआ है। इसके साथ ही मौलाना तौकीर रज़ा के खिलाफ अकेले 7 FIR दर्ज हुई हैं। पुलिस का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए आगे और धाराएं भी जोड़ी जा सकती हैं।
अब तक 8 गिरफ्तार, 39 हिरासत में
इस मामले को लेकर पुलिस ने हिंसा में शामिल लोगों पर ताबड़तोड़ कार्रवाई की है। मौलाना समेत 8 लोगों को जेल भेज दिया गया है, जबकि 39 लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। बरेली हिंसा में अब तक 22 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं।
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क्या था पूरा मामला?
बताया जा रहा है कि मौलाना तौकीर रज़ा ने "आई लव मोहम्मद" अभियान के समर्थन में प्रदर्शन का ऐलान किया था लेकिन प्रशासन से अनुमति न मिलने पर उन्होंने इसे ऐन वक्त पर रद्द कर दिया। इसी फैसले से नाराज लोग मस्जिद और मौलाना के घर के बाहर जमा हो गए। धीरे-धीरे भीड़ ने उग्र रूप धारण कर लिया और पथराव शुरू हो गया।
प्रशासन की अपील- "अफवाहों पर ना दें ध्यान"
वहीं इस पूरे मामले को लेकर बरेली के डीएम अविनाश सिंह ने कहा है कि पुलिस ने सख्ती से हालात पर काबू पा लिया है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि किसी भी अफवाह पर ध्यान न दें। वहीं राज्य सरकार ने बयान जारी कर हिंसा को एक सुनियोजित साजिश बताया, जिसका मकसद पश्चिमी यूपी का माहौल बिगाड़ना और निवेश को नुकसान पहुंचाना था।
वीडियो और तस्वीरों से होगी पहचान
डीआईजी अजय कुमार साहनी का कहना है कि उपद्रवियों की पहचान के लिए वीडियो और तस्वीरों की जांच की जा रही है। हर एक आरोपी पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस का दावा है कि शांतिपूर्ण माहौल बिगाड़ने वालों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा।