जबलपुर के बरगी डैम में हुए दर्दनाक क्रूज हादसे ने कई जिंदगियों को हमेशा के लिए बदल दिया। इस हादसे में 72 वर्षीय रियाज हुसैन ने चार घंटे तक मौत से संघर्ष किया। डूबते क्रूज में गर्दन तक पानी में फंसे रियाज ने उम्मीद नहीं छोड़ी और आखिरकार रेस्क्यू टीम ने उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला। हालांकि इस हादसे में कई लोग अपनी जान गंवा चुके हैं और कुछ अब भी लापता हैं।
अचानक बदला मौसम, मच गई अफरा-तफरी
गुरुवार शाम क्रूज जैसे ही नर्मदा नदी के बैकवाटर क्षेत्र में पहुंचा, मौसम ने अचानक करवट ले ली। तेज हवाएं और ऊंची लहरों ने क्रूज को डगमगाना शुरू कर दिया। कुछ ही पलों में हालात बेकाबू हो गए और यात्रियों में चीख-पुकार मच गई।
डूबते क्रूज में जिंदगी की जंग
रियाज हुसैन अपने परिवार के साथ यात्रा पर थे, लेकिन यह सफर भयावह बन गया। क्रूज में पानी भरने लगा और वह तेजी से डूबने लगा। रियाज को क्रूज का एक हिस्सा मिला, जो थोड़ा ऊपर था। वहीं टिककर उन्होंने खुद को संभाला, लेकिन जल्द ही पानी उनकी गर्दन तक पहुंच गया।
उम्मीद टूटती दिखी, फिर भी नहीं मानी हार
चारों ओर अंधेरा, ठंडा पानी और डरावनी लहरों के बीच रियाज को लगा कि अब बचना मुश्किल है। उन्होंने खुद भी मान लिया था कि शायद अब जिंदगी खत्म हो जाएगी। इसके बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं छोड़ी और चार घंटे तक उसी स्थिति में टिके रहे।
आवाज बनी जीवन की डोर
काफी देर बाद रियाज को बाहर से लोगों की आवाज सुनाई दी। यह उनके लिए नई उम्मीद लेकर आई। उन्होंने पूरी ताकत से क्रूज की दीवारों पर हाथ मारकर संकेत दिया। उनकी आवाज सुनकर रेस्क्यू टीम तुरंत हरकत में आई।
रेस्क्यू ऑपरेशन और अधूरी खुशियां
बचाव दल ने गैस कटर से क्रूज का हिस्सा काटकर रियाज को बाहर निकाला। इस हादसे में 23 लोगों को बचाया गया, जबकि 9 की मौत हो चुकी है। रियाज की पत्नी और समधन अब भी लापता हैं, जिससे उनकी खुशी अधूरी है। यह हादसा पूरे इलाके को गहरे सदमे में डाल गया है।