हिंदू धर्म में बसोड़ा या Sheetala Ashtami का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। इस दिन Sheetala Mata की पूजा की जाती है और उन्हें बासी भोजन का भोग अर्पित किया जाता है। परंपरा के अनुसार इस दिन घरों में चूल्हा नहीं जलाया जाता। मान्यता है कि ऐसा करने से माता प्रसन्न होती हैं और परिवार को रोगों से बचाकर सुख-समृद्धि और आरोग्य का आशीर्वाद देती हैं।
बसोड़ा 2026 की तिथि और शुभ मुहूर्त
हिंदू पंचांग के अनुसार बसोड़ा का पर्व चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। वर्ष 2026 में यह तिथि 11 मार्च की देर रात 1 बजकर 54 मिनट से शुरू होगी और 12 मार्च की सुबह 4 बजकर 19 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि के अनुसार इस साल बसोड़ा 11 मार्च को मनाया जाएगा। इस दिन पूजा का शुभ समय सुबह 6 बजकर 35 मिनट से शाम 6 बजकर 27 मिनट तक माना गया है।
बसोड़ा पर क्यों लगाया जाता है बासी भोजन का भोग
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शीतला माता को शीतलता अत्यंत प्रिय है। इसी कारण बसोड़ा से एक दिन पहले यानी शीतला सप्तमी के दिन भोजन बनाकर रख लिया जाता है। अष्टमी के दिन माता को वही ठंडा और बासी भोजन जैसे दही, रबड़ी, चावल, पुए और परांठे का भोग लगाया जाता है। इसके बाद परिवार के सदस्य उसी भोजन को प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं। इस दिन चूल्हा जलाना वर्जित माना जाता है, क्योंकि अग्नि को गर्मी का प्रतीक माना गया है।
बसोड़ा की पारंपरिक पूजन विधि
बसोड़ा की पूजा से एक दिन पहले शाम को शीतला माता के लिए प्रसाद तैयार कर लिया जाता है। इसमें मीठे चावल, हलवा, पूड़ियां और मौसमी सब्जियां शामिल की जाती हैं। अष्टमी के दिन सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण किए जाते हैं और पूजा की थाली में रोली, हल्दी, अक्षत, फूल और ठंडा जल रखा जाता है। इसके बाद माता की प्रतिमा या चित्र के सामने बैठकर श्रद्धा से पूजा की जाती है और एक दिन पहले तैयार किया गया भोजन अर्पित किया जाता है।
घर में शांति और आरोग्य की कामना
पूजा के बाद माता को अर्पित जल को घर में छिड़का जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इससे घर की नकारात्मकता दूर होती है और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। बसोड़ा का पर्व केवल धार्मिक आस्था ही नहीं बल्कि स्वच्छता, स्वास्थ्य और ऋतु परिवर्तन के प्रति जागरूकता का भी प्रतीक माना जाता है। यही कारण है कि इस दिन लोग माता शीतला से परिवार के अच्छे स्वास्थ्य और समृद्धि की प्रार्थना करते हैं।