केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने जगदलपुर के मुरिया दरबार में बस्तर को नक्सलमुक्त करने की स्पष्ट तिथि घोषित की: 31 मार्च 2026। उन्होंने कहा कि 26 मार्च से पहले भी बस्तर नक्सलमुक्त करने के प्रयास तेज होंगे और तिथि के बाद नक्सली यहां के विकास और लोगों के अधिकार रोक नहीं पाएंगे। दोनों सरकारें—केंद्र और राज्य—विकास व सुरक्षा के संयुक्त कदमों के ज़रिये मुख्यधारा में लौटने वालों को समर्थन दे रही हैं और आत्मसमर्पण नीति को आकर्षक बताया जा रहा है।
यात्रा और सभा का संदेश
बस्तर दौरे के दौरान आयोजित मुरिया दरबार में भारी उपस्थिति देखी गई। मंत्री ने सभा को संबोधित करते हुए नक्सलवाद के खिलाफ सरकार की नीतियों और साजो-सामानिक तैयारियों का हवाला दिया। उनका कहना था कि अब वार्ता की नहीं बल्कि परिणाम देने की घड़ी है — हथियार डालें और विकास का लाभ उठाएं। सुरक्षा बलों और स्थानीय प्रशासन को संवैधानिक तरीके से कार्रवाई करने का भरोसा भी दिया गया।
आत्मसमर्पण नीति और विकास के वादे
सरकार ने आत्मसमर्पण नीति को आकर्षक बताया है और मुख्यधारा में लौटने वालों के लिए सहायता-पैकेज का आश्वासन दिया। साथ ही स्थानीय विकास के भरोसे के तौर पर गांवों को नक्सलमुक्त घोषित होने पर निधि की भी घोषणा की गई — जिससे ग्राम स्तर पर बुनियादी सुविधाओं और योजनाओं को तेज़ी से लागू करने की बात कही गई।
आलोचना और प्रतिक्रियाएँ
कुछ बाबतों में सवाल भी उठ रहे हैं — आलोचकों का कहना है कि केवल तारीख घोषित करने भर से समस्या हल नहीं होगी; जमीन पर समेकित विकास, शिक्षा और रोज़गार के टिकाऊ विकल्प जरूरी हैं। वहीं कई स्थानीय नेताओं और सामाजिक संगठनों ने युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ने पर जोर दिया और शांति की अपील की।
आगे का नक्शा
केन्द्रीय व राज्य स्तर पर तैयार योजनाओं का क्रियान्वयन और सुरक्षा-निर्बंधों का संयोजन निर्णायक रहेगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि तिथि के बाद किसी भी तरह की शांति भंग करने पर क़ठोर कार्रवाई होगी, जबकि आत्मसमर्पण करने वालों को पुनर्वास के विकल्प और योजनाएं दी जाएंगी।