भारत विविध आस्थाओं और परंपराओं का देश है, जहां हर क्षेत्र की अपनी एक खास धार्मिक विरासत है। छत्तीसगढ़ के बस्तर इलाके में स्थित कोटमसर गांव की एक अद्भुत परंपरा लोगों की आस्था का केंद्र बनी हुई है। यहां की आराध्य देवी बास्ताबुंदिन को भक्त काला चश्मा चढ़ाते हैं। यह परंपरा न केवल धार्मिक भावना से जुड़ी है बल्कि प्रकृति और कृषि की रक्षा के गहरे संदेश को भी संजोए हुए है।
कोटमसर में देवी बास्ताबुंदिन की अनोखी पूजा
बस्तर जिले के कांगेर वैली नेशनल पार्क स्थित कोटमसर गांव में देवी बास्ताबुंदिन की पूजा एक विशेष परंपरा के तहत की जाती है। हर तीन साल में मां की यात्रा और बड़े मेले का आयोजन होता है, जिसमें भक्त देवी को काला चश्मा अर्पित करते हैं। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है और अब यह पूरे गांव की सामूहिक श्रद्धा का प्रतीक बन चुकी है।
क्यों चढ़ाया जाता है देवी को काला चश्मा?
मान्यता है कि देवी को काला चश्मा चढ़ाने से वह जंगलों, खेती और लोगों को बुरी नजर से बचाती हैं। पहले यह पूजा एक ही परिवार करता था, लेकिन अब यह पूरे गांव की परंपरा बन चुकी है। ग्रामीणों का मानना है कि देवी की कृपा से उनकी फसलें सुरक्षित रहती हैं और प्राकृतिक आपदाओं से रक्षा होती है।
आदिवासी संस्कृति की अनूठी पहचान
यह परंपरा बस्तर की समृद्ध आदिवासी संस्कृति और प्रकृति से जुड़ी आस्था को दर्शाती है। यह एक ऐसा उदाहरण है, जहां आध्यात्मिकता और पर्यावरण संरक्षण एक साथ चलते हैं। आज की युवा पीढ़ी भी इस परंपरा को पूरी श्रद्धा और विश्वास से निभा रही है।