बांग्लादेश में बाउल कलाकार अबुल सरकार की गैर-कानूनी तरीके से गिरफ्तारी को लेकर बवाल मच गया है। अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन ने अबुल सरकार की “गैर-कानूनी गिरफ्तारी” की कड़ी निंदा की। बाउल कलाकार पर धार्मिक बदनामी का आरोप लगा है। मानवाधिकार संगठन ने इसे झूठा और मनगढ़ंत बताया।
बिना शर्त रिहाई की मांग की
मानवाधिकार की ओर से इस सिलसिले में एक बयान भी जारी किया गया है। इसके अलावा जस्टिस मेकर्स बांग्लादेश इन फ्रांस (जेएमबीएफ) ने रविवार को मानिकगंज जिले में मानव श्रृंखला बनाकर प्रदर्शन किया और सरकार से बाउल कलाकार की बिना शर्त रिहाई की मांग की।
हिंसक हमले की मानवाधिकार संगठन ने घोर निंदा की
इस दौरान तौहीदी जनता नाम के एक इस्लामी कट्टरपंथी ग्रुप के हिंसक हमले की मानवाधिकार संगठन ने घोर निंदा की। जेएमबीएफ ने स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स और सोर्स के हवाले से बताया कि इस्लामी कट्टरपंथियों के हमले में बाउल म्यूजिक सुनने वाले तीन लोग, अब्दुल अलीम, जोहुरुल और अरिफुल इस्लाम, गंभीर रूप से घायल हो गए।
स्थिति बहुत चिंताजनक है
मानवाधिकार संगठन ने कहा, “हमलावर कानून लागू होने के बावजूद भी बिना किसी सजा के ऐसी हिंसा की। यह दिखाता है कि सरकार सांस्कृतिक कार्यकर्ताओं और शांति पसंद नागरिकों को सुरक्षा मुहैया कराने में बुरी तरह नाकाम रही है। यह स्थिति बहुत चिंताजनक है।”
जेएमबीएफ के मुताबिक, 19 नवंबर की रात को, ढाका मेट्रोपॉलिटन पुलिस की डिटेक्टिव ब्रांच (डीबी) ने सरकार को बांग्लादेश के मदारीपुर जिले में एक संगीत के कार्यक्रम से हिरासत में लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप एक “तोड़-मरोड़कर पेश किए गए, गुमराह करने वाले और जानबूझकर एडिट किए गए वीडियो पर आधारित हैं, जिसे सोशल मीडिया पर फैलाया गया था।”