इंग्लैंड की लीग में पाकिस्तानी खिलाड़ी को खरीदने के बाद एक नया विवाद खड़ा हो गया है। सनराइजर्स ग्रुप की टीम सनराइजर्स लीड्स ने नीलामी में पाकिस्तान के स्पिन गेंदबाज अबरार अहमद को अपनी टीम में शामिल किया। इसके बाद सोशल मीडिया पर कई क्रिकेट फैंस नाराज हो गए। कुछ लोगों ने इसे लेकर कड़ी प्रतिक्रिया दी और टीम के खिलाफ अभियान चलाने की बात भी कही। यह मामला इसलिए भी चर्चा में आया क्योंकि यह टीम भारतीय स्वामित्व वाली फ्रेंचाइजी से जुड़ी हुई है।
फैंस की नाराजगी का कारण
कई क्रिकेट प्रशंसकों का मानना है कि भारतीय फ्रेंचाइजी से जुड़े किसी समूह द्वारा पाकिस्तानी खिलाड़ी को खरीदना विवाद का कारण बन गया है। सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने इस फैसले पर सवाल उठाए और टीम की आलोचना की। कुछ फैंस ने यहां तक कहा कि इस फैसले से उन्हें निराशा हुई है। हालांकि क्रिकेट विशेषज्ञों का कहना है कि विदेशी लीगों में खिलाड़ियों का चयन अक्सर टीम की जरूरत और प्रदर्शन के आधार पर किया जाता है।
बोर्ड ने खुद को किया अलग
इस पूरे मामले में भारतीय क्रिकेट बोर्ड की पहली प्रतिक्रिया भी सामने आ गई है। बोर्ड के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने स्पष्ट कहा है कि विदेशी लीगों में होने वाले फैसलों से उनका कोई संबंध नहीं है। उनका कहना है कि किस लीग में कौन सी टीम किस खिलाड़ी को खरीदती है, यह पूरी तरह उस लीग और फ्रेंचाइजी का निर्णय होता है। इसलिए बोर्ड का इस मामले में हस्तक्षेप करना संभव नहीं है।
अन्य टीमों ने नहीं खरीदा पाकिस्तानी खिलाड़ी
बताया जा रहा है कि इस लीग में भारतीय स्वामित्व से जुड़ी कई अन्य टीमें भी मौजूद हैं, लेकिन उनमें से किसी ने भी पाकिस्तानी खिलाड़ी के लिए बोली नहीं लगाई। केवल सनराइजर्स लीड्स ने अबरार अहमद को अपनी टीम में शामिल किया। इसी वजह से यह फैसला चर्चा का विषय बन गया है।
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विदेशी लीगों में अलग नियम और व्यवस्था
क्रिकेट विशेषज्ञों का कहना है कि दुनिया की अलग-अलग लीगों के अपने नियम और व्यवस्थाएं होती हैं। इन लीगों में टीमों को खिलाड़ियों को चुनने की स्वतंत्रता दी जाती है और चयन आम तौर पर प्रदर्शन तथा टीम की जरूरतों के आधार पर किया जाता है। इसलिए किसी विदेशी लीग में लिए गए फैसले को सीधे घरेलू क्रिकेट से जोड़कर देखना सही नहीं माना जाता।
चर्चा के बीच आगे बढ़ेगी लीग की तैयारी
फिलहाल इस विवाद के बावजूद लीग की तैयारियां जारी हैं। टीम प्रबंधन का मानना है कि खिलाड़ियों का चयन क्रिकेट रणनीति के आधार पर किया गया है। वहीं कई विशेषज्ञों का कहना है कि समय के साथ यह विवाद शांत हो सकता है और मैदान पर खिलाड़ियों का प्रदर्शन ही असली चर्चा का विषय बनेगा।