BCCI Support Staff Review : भारतीय टीम लगातार खिलाड़ियों की चोटों से जूझ रही है। श्रीलंका के खिलाफ 15 अगस्त से शुरू होने वाली टेस्ट सीरीज से पहले जसप्रीत बुमराह चोट के कारण बाहर हो चुके हैं। उनकी जगह जम्मू-कश्मीर के तेज गेंदबाज आकिब नबी को टीम में शामिल किया गया है। हाल के महीनों में कई अहम खिलाड़ियों के चोटिल होने के बाद बीसीसीआई अब पूरे मेडिकल और फिटनेस सिस्टम की समीक्षा करने की तैयारी में है।
श्रीलंका सीरीज के बाद होगी बड़ी समीक्षा
रिपोर्ट्स के मुताबिक श्रीलंका टेस्ट सीरीज समाप्त होने के बाद बीसीसीआई टीम के हेड फिजियो कमलेश जैन, टीम डॉक्टर डॉ. रिजवान खान और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CoE) की कार्यप्रणाली की विस्तृत समीक्षा करेगा। यदि समीक्षा में किसी तरह की कमी पाई जाती है, तो सपोर्ट स्टाफ में बदलाव भी किए जा सकते हैं। बोर्ड खिलाड़ियों की फिटनेस से जुड़े पूरे सिस्टम का आकलन करेगा।
गंभीर और गिल भी जता चुके हैं चिंता
हेड कोच गौतम गंभीर और कप्तान शुभमन गिल भी लगातार खिलाड़ियों के चोटिल होने पर चिंता जता चुके हैं। हाल के दौरों में टीम को कई बार अंतिम समय में फिटनेस के कारण अपनी प्लेइंग इलेवन बदलनी पड़ी। शुभमन गिल ने भी कहा था कि मैच के दिन किसी खिलाड़ी की चोट की जानकारी मिलने से पूरी रणनीति प्रभावित हो जाती है और बाकी गेंदबाजों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।
कई स्टार खिलाड़ी फिटनेस से जूझ रहे
हाल के महीनों में जसप्रीत बुमराह, हर्षित राणा, नीतीश कुमार रेड्डी, वॉशिंगटन सुंदर, साई सुदर्शन, हार्दिक पंड्या और वरुण चक्रवर्ती जैसे खिलाड़ी चोट या फिटनेस समस्याओं से प्रभावित रहे हैं। इसी वजह से कई बार टीम अपनी पहली पसंद की प्लेइंग इलेवन के साथ मैदान पर नहीं उतर सकी। रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि कुछ खिलाड़ी फिटनेस और रिकवरी के लिए बाहरी विशेषज्ञों की मदद भी ले रहे हैं।
इसे भी पढे़ं : 50 गेंद से कम में तीन वनडे शतक लगाने वाला दुनिया का इकलौता बल्लेबाज, Jos Buttler ने बनाया अनोखा रिकॉर्ड
इन सवालों पर रहेगी बीसीसीआई की नजर
समीक्षा के दौरान बीसीसीआई इस बात की भी जांच कर सकता है कि क्या खिलाड़ियों को पूरी तरह फिट होने से पहले मैदान पर उतारा गया, क्या वर्कलोड और रिकवरी की सही निगरानी हो रही है और क्या टीम मैनेजमेंट तथा सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत है। श्रीलंका सीरीज के बाद एशियन गेम्स, न्यूजीलैंड दौरा, बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी और अगले विश्व कप जैसे बड़े टूर्नामेंट को देखते हुए बोर्ड अब खिलाड़ियों की फिटनेस को लेकर कोई जोखिम नहीं लेना चाहता।