
Silent Heart Attack: आजकल डेस्क जॉब की वजह से लोग दिनभर कुर्सी पर बैठकर काम करते हैं। डेस्क जॉब करने वालों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। लेकिन क्या आप जानते हैं लंबे समय तक बैठकर काम करने से दिल की सेहत पर बुरा असर पड़ता है। इसमें साइलेंट हार्ट अटैक का खतरा भी शामिल है। जी हां क्योंकि लगातार बैठने से ब्लड सर्कुलेशन धीमा पड़ जाता है, जिससे दिल तक खून और ऑक्सीजन पहुंचाने की क्षमता कम हो जाती है।
ब्लड सर्कुलेशन बेहतर तरीके से नहीं हो पाता
आपका बता दें कि लंबे समय तक लगातार बैठकर काम करने पर ब्लड सर्कुलेशन बेहतर तरीके से नहीं हो पाता है, धीमा पड़ जाता है। जिसकी वजह से दिल तक खून और ऑक्सीजन पहुंचाने की क्षमता कम हो जाती है। जब दिल तक खून और ऑक्सीजन बेहतर तरीके से नहीं पहुंचता है, तो वह हार्ट अटैक और स्ट्रोक के खतरे को बढ़ा देता है। हार्ट अटैक के साथ-साथ लंबे समय तक बैठकर काम करने से मोटापा, डायबिटीज, हाई बीपी, और कमर दर्द, साइटिका और सर्वाइकल जैसी बीमारियों का खतरा भी बढ़ता है।
किन लोगों को होता है ज्यादा खतरा
साइलेंट हार्ट अटैक का खतरा उन लोगों को ज्यादा होता है, जो लंबे समय तक डेस्क पर बैठकर काम करते हैं। या फिर मोटापा, हाई बीपी और डायबिटीज भी साइलेंट हार्ट अटैक के जोखिम को बढ़ाता है। वहीं, मानसिक तनाव और नींद की कमी से ग्रस्त लोगों में हार्ट अटैक का खतरा ज्यादा रहता है।
साइलेंट हार्ट अटैक क्या है?
आपका बता दें कि साइलेंट हार्ट अटैक एक ऐसा अटैक है, जिसमें छाती में दर्द या सांस फूलने जैसे लक्षण महसूस नहीं होते हैं। जब तक नियमित जांच या किसी अन्य कारण से ईसीजी नहीं किया जाता, तब तक व्यक्ति को पता ही नहीं चलता कि उसे दिल का दौरा पड़ा है। वहीं, कई बार लोग गैस, तनाव जैसे सामान्य स्थिति समझकर भी नजर अंदाज कर देते हैं। इस वजह से मरीज समय पर इलाज नहीं करा पाते और दिल की क्षति बढ़ सकती है।