Bhati-Jatav Case: मेरठ में दिग्विजय सिंह भाटी और मोहित जाटव के साथ पुलिस हिरासत में कथित मारपीट और थर्ड डिग्री के आरोपों को लेकर विवाद बढ़ गया है। दोनों की ओर से लगाए गए आरोपों के बाद ADG जोन भानु भास्कर ने मामले की जांच सहारनपुर के DIG को सौंप दी है। दूसरी ओर मेरठ पुलिस ने आरोपों को खारिज करते हुए दावा किया है कि दोनों को पुलिस ने नहीं पीटा, बल्कि 19 अगस्त को पुलिस कार्यालय से लौटते समय उनकी स्कूटी फिसल गई थी, जिससे उन्हें चोटें आईं। पुलिस ने यह भी कहा कि दोनों ने घटना के संबंध में खुद लिखित प्रार्थनापत्र दिया था।
पुलिस ने स्कूटी फिसलने को बताया चोट का कारण
मेरठ पुलिस के मुताबिक दिग्विजय भाटी और मोहित जाटव 19 अगस्त को सिविल लाइन थाने में दर्ज मुकदमे के सिलसिले में पुलिस कार्यालय आए थे। वहां से वापस लौटते समय उनकी स्कूटी फिसल गई और दोनों घायल हो गए। पुलिस का दावा है कि दोनों ने खुद थाने में लिखित शिकायत दी, जिसे सामान्य डायरी में शाम 5:31 बजे दर्ज किया गया। इसके बाद दिग्विजय भाटी की ओर से पुलिस पर मारपीट के आरोप लगाए गए। पुलिस ने वीडियो में लगाए गए आरोपों को तथ्यहीन और निराधार बताया है।
दोनों के खिलाफ दर्ज मुकदमों का भी पुलिस ने दिया ब्योरा
पुलिस ने अपने बयान में दिग्विजय भाटी और मोहित जाटव के आपराधिक रिकॉर्ड की जानकारी भी साझा की है। पुलिस के अनुसार दिग्विजय भाटी के खिलाफ 2008 से 2026 के बीच अलग-अलग थानों में कुल 10 मुकदमे दर्ज हैं। इनमें मारपीट, बलवा, धमकी और सरकारी काम में बाधा जैसे आरोपों से जुड़े मामले शामिल बताए गए हैं। वहीं मोहित जाटव के खिलाफ 2015 से 2026 तक सात मुकदमों का उल्लेख किया गया है। पुलिस ने दोनों को अपने-अपने थाना क्षेत्रों का हिस्ट्रीशीटर भी बताया है।
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आरोपों की जांच सहारनपुर DIG को सौंपी गई
मामला सामने आने के बाद ADG जोन ने जांच की जिम्मेदारी सहारनपुर के DIG को दी है। दिग्विजय भाटी का कहना है कि उनकी शिकायत पर पहले FIR दर्ज होनी चाहिए और उसके बाद निष्पक्ष जांच की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि उनके आरोप गलत साबित होते हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई हो, लेकिन यदि पुलिसकर्मियों पर लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ भी कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।
अतुल प्रधान और अखिलेश यादव ने उठाए सवाल
समाजवादी पार्टी के विधायक अतुल प्रधान ने मामले को लेकर मेरठ पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए और उच्चस्तरीय जांच की मांग की। वहीं सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी घटना को लेकर भाजपा सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने पुलिस पर किसान नेताओं के साथ कथित दुर्व्यवहार और थर्ड डिग्री के इस्तेमाल का आरोप लगाते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। हालांकि, आरोपों की वास्तविकता जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी। फिलहाल सहारनपुर DIG की जांच रिपोर्ट का इंतजार है, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।