बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री और अवामी लीग की अध्यक्ष शेख हसीना ने एक बार फिर देश लौटने की अपनी योजना दोहराई है। भारत में रह रहीं हसीना ने कहा है कि वह संभावित गिरफ्तारी या जेल जाने के बावजूद बांग्लादेश वापस जाएंगी और अपनी पार्टी को फिर से राजनीतिक रूप से खड़ा करने की कोशिश करेंगी। उनके इस रुख से बांग्लादेश की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है।
कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है
शेख हसीना ने जुलाई 2026 में दिए एक इंटरव्यू में कहा था कि उन्हें पता है कि बांग्लादेश लौटने पर उन्हें जेल भेजा जा सकता है या इससे भी गंभीर कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। इसके बावजूद उन्होंने अदालत के सामने पेश होने की बात कही थी। उन्होंने अपने खिलाफ दिए गए फैसले को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया और आरोपों से इनकार किया।
हसीना ने जुलाई में रॉयटर्स से बातचीत में यह भी कहा था कि वह और अवामी लीग के वरिष्ठ नेता दिसंबर के आसपास भारत से बांग्लादेश लौटकर अदालत के सामने आत्मसमर्पण करने की योजना बना रहे हैं। उनका कहना था कि पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं पर दबाव के बीच वह देश से दूर नहीं रह सकतीं।
अवामी लीग को फिर खड़ा करने की तैयारी
अवामी लीग की राजनीतिक गतिविधियों पर बांग्लादेश में प्रतिबंध लगा हुआ है। इसके बावजूद हसीना पार्टी के भविष्य को लेकर लगातार बयान दे रही हैं। सितंबर में उन्होंने कहा कि उनकी अनुपस्थिति में वरिष्ठ नेता शेख फजलुल करीम सेलिम पार्टी की अध्यक्षता संभाल सकते हैं। इससे संकेत मिलता है कि पार्टी नेतृत्व वापसी और संगठन को सक्रिय रखने की रणनीति पर काम कर रहा है।
ढाका का रुख सख्त
बांग्लादेश सरकार का रुख हसीना की संभावित वापसी को लेकर स्पष्ट है। विदेश मामलों की राज्य मंत्री शमा ओबैद इस्लाम ने कहा था कि अगर हसीना आत्मसमर्पण करती हैं तो मौजूदा कानून के तहत उन्हें जेल जाना होगा। सरकार भारत से उनके प्रत्यर्पण की मांग भी कर चुकी है।
सितंबर में प्रधानमंत्री के सूचना सलाहकार जाहेद उर रहमान ने भी कहा कि सरकार हसीना को वापस लाना चाहती है। वहीं, हसीना की ओर से लगातार वापसी की बात किए जाने से भारत-बांग्लादेश संबंधों में भी यह मुद्दा महत्वपूर्ण बना हुआ है।
दिसंबर में हसीना की संभावित वापसी
ऐसे में दिसंबर में हसीना की संभावित वापसी, उनके खिलाफ चल रही कानूनी प्रक्रिया और अवामी लीग को दोबारा सक्रिय करने की कोशिशें बांग्लादेश की राजनीति के अहम मुद्दों में बनी हुई हैं।