
बीजिंग आज (3 सितंबर 2025) दुनिया की सुर्खियों में था। वजह थी चीन की विक्ट्री डे मिलिट्री परेड, जिसमें चीन ने अपनी सैन्य ताकत का भव्य प्रदर्शन किया। परेड का मकसद था द्वितीय विश्व युद्ध में जापान की हार की 80वीं वर्षगांठ को याद करना लेकिन इस आयोजन का असली संदेश अमेरिका और पश्चिमी ताकतों के लिए था, यह बताने के लिए कि चीन अकेला नहीं है, बल्कि उसके साथ वो देश खड़े हैं जो लंबे समय से अमेरिका के दुश्मन रहे हैं।
रेड कार्पेट पर चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन एक साथ चलते दिखाई दिए। इनके साथ ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान भी मौजूद थे। यह पहली बार था जब ये तीनों दिग्गज एक ही मंच पर खुलेआम नजर आए। इस नज़ारे ने यह सवाल खड़ा कर दिया कि क्या बीजिंग में अमेरिका-विरोधी मोर्चा तैयार हो रहा है?
बीजिंग में क्यों जुटे अमेरिका के दुश्मन?
चीन ने इस परेड में आधुनिक हथियारों की झलक दिखाई, जेट लड़ाकू विमान, मिसाइलें और इलेक्ट्रॉनिक युद्धक उपकरण सबके सामने रखे गए। इस आयोजन में 26 देशों के नेता शामिल हुए, जिनमें रूस, ईरान, म्यांमार, मलेशिया, इंडोनेशिया और मध्य एशिया के कई देश शामिल थे। सैकड़ों सैनिकों की मार्चिंग और चीन की ताकतवर झलक ने इस इवेंट को खास बना दिया।
मगर इस बड़े जमावड़े में एक नाम सबसे ज्यादा चर्चा में आ गया- पाकिस्तान आर्मी चीफ जनरल आसिम मुनीर।
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ट्रंप का "भेदिया" आसिम मुनीर?
आसिम मुनीर भी परेड में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के साथ पहुंचे थे। सवाल यह उठा कि क्या वे सिर्फ परेड देखने आए हैं या उनकी मौजूदगी के पीछे कोई और कारण है? दरअसल, पिछले कुछ महीनों में आसिम मुनीर का झुकाव अमेरिका की ओर बढ़ा है। वे ट्रंप से दो बार मुलाकात कर चुके हैं, एक बार तो ट्रंप ने उन्हें बिरयानी की दावत दी थी। इतना ही नहीं, मुनीर ने ट्रंप को नोबेल देने की सिफारिश तक कर डाली थी।
इसी वजह से अब अटकलें लगाई जा रही हैं कि बीजिंग की इस महफिल से जुड़ी खबरें ट्रंप तक सबसे भरोसेमंद तरीके से आसिम मुनीर ही पहुंचा सकते हैं। यानी चीन की "एंटी-अमेरिका महफिल" में पाकिस्तान आर्मी चीफ किसी गुप्त भूमिका में थे?
नया समीकरण या नया षड्यंत्र?
परेड का मंच भले ही सैन्य ताकत दिखाने के लिए था, लेकिन तस्वीर का दूसरा पहलू राजनीति से जुड़ा है। अमेरिका के तीन बड़े दुश्मनों रूस, उत्तर कोरिया और ईरान के साथ चीन की नजदीकी और उस मंच पर पाकिस्तान आर्मी चीफ की मौजूदगी यह संकेत देती है कि दुनिया में एक नए शक्ति संतुलन की नींव रखी जा रही है।