जौनपुर के बेलाव घाट में 1 अप्रैल 2010 को हुए दोहरे हत्याकांड के 15 साल बाद, इस मामले में फंसे पूर्व सांसद धनंजय सिंह और अन्य तीन आरोपियों को एमपी–एमएलए कोर्ट ने निर्दोष करार देते हुए बरी कर दिया है. कोर्ट ने पाया कि पुलिस द्वारा पेश किए गए 28 गवाहों में से अधिकतर की गवाही असंगत थी, जिससे साजिश और हत्या के आरोपों को साबित करने में विफलता हुई. धनंजय सिंह ने फैसले के बाद इसे राजनीतिक साजिश करार देते हुए अपनी निर्दोषता पर भरोसा जताया, जबकि उनके समर्थन में खड़े लोग कोर्टहाउस के बाहर खुशियाँ मना रहे थे .
क्या है पूरा मामला?
घटना की तारीख1 अप्रैल 2010... बेलांव घाट इलाके में टोल-विवाद के दौरान दो निषाद समाज से जुड़े लोग संजय निषाद और नंदलाल निषाद की गोली मारकर हत्या की गई थी. पुलिस ने इसे ठेकेदारी गतिरोध और साजिश से जोड़ा.
सीधा आरोप धनंजय सिंह, उनके करीबी आशुतोष सिंह, पुनीत सिंह और सुनीत सिंह पर था. सभी के खिलाफ इस हत्या की साजिश रचने के आरोप में चार्जशीट किया गया.
गवाहों के बयान ने पलट दी तस्वीर
केस में पुलिस ने 20 गवाह अदालत में प्रस्तुत किए, लेकिन अधिकांश गवाहों ने बयान बदल दिए और अदालत के समक्ष मुकर गये. गवाहों के अभाव में एमपी‑एमएलए कोर्ट ने सभी चार आरोपियों को निर्दोष बरी कर दिया.
बाहर आते ही क्या बोले धनंजय
बरी होते ही धनंजय सिंह ने कहा कि यह राजनैतिक बदले की साजिश थी और उनके खिलाफ झूठे आरोप लगाए गए थे. बरी होने पर कोर्टरूम के बाहर मौजूद समर्थकों ने जोश में खुशी का उत्साह मनाया.