पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में इस बार मुकाबला सिर्फ राजनीतिक दलों के बीच नहीं, बल्कि महिला वोट बैंक को लेकर बेहद दिलचस्प हो गया है। एक तरफ ममता बनर्जी की अगुवाई में टीएमसी ने बड़ी संख्या में महिला उम्मीदवार उतारकर अपनी महिला ब्रिगेड को मजबूत किया है, तो दूसरी ओर भाजपा ने महिला आरक्षण और आर्थिक योजनाओं के जरिए सीधी चुनौती दी है। इस बार चुनाव का केंद्र ‘आधी आबादी’ बन चुकी है, जिससे सियासी पारा और भी चढ़ गया है।
टीएमसी का महिला चेहरों पर दांव, जमीनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश
टीएमसी ने महिला वोटर्स को साधने के लिए अपने सबसे मजबूत हथियार मैदान में उतारे हैं। चंद्रिमा भट्टाचार्य, शताब्दी रॉय, सायोनी घोष, जून मालिया और रचना बनर्जी जैसे चेहरे लगातार मैदान में सक्रिय हैं। ये नेता गांव-गांव जाकर महिलाओं से सीधे संवाद कर रही हैं और ‘मां, माटी, मानुष’ के नारे को मजबूत बना रही हैं। पार्टी का फोकस सिर्फ प्रचार नहीं, बल्कि भावनात्मक जुड़ाव पर है, जिससे महिला वोटर्स का भरोसा कायम रखा जा सके।
बीजेपी का काउंटर अटैक, बड़े चेहरों से बदला खेल
इसके जवाब में भाजपा ने भी बड़ा दांव खेला है। कंगना रनौत जैसी स्टार प्रचारक ने नंदीग्राम में रोड शो कर माहौल बना दिया। उनके अलावा कई बड़े महिला चेहरे अलग-अलग क्षेत्रों में सक्रिय हैं, जो महिला वोटर्स को आकर्षित करने की कोशिश कर रहे हैं। बीजेपी की रणनीति साफ है कि महिला वोट बैंक में सेंध लगाकर चुनावी समीकरण बदले जाएं।
योजनाओं की जंग, लक्ष्मी भंडार बनाम मातृ शक्ति वंदन
टीएमसी ‘लक्ष्मी भंडार’ जैसी योजनाओं के जरिए महिलाओं को आर्थिक सहारा देने का दावा कर रही है। वहीं भाजपा ने ‘मातृ शक्ति वंदन’ योजना के तहत हर महिला को ₹3000 देने का वादा किया है। यह सीधी टक्कर योजनाओं के स्तर पर भी दिखाई दे रही है। दोनों दल महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और आर्थिक सशक्तिकरण को मुद्दा बनाकर वोटर्स को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं।
टिकट वितरण में भी फर्क, आंकड़ों से दिखी रणनीति
आंकड़ों पर नजर डालें तो टीएमसी ने 52 महिला उम्मीदवार उतारकर लगभग 27.2% हिस्सेदारी दी है। वहीं भाजपा ने 33 महिलाओं को टिकट दिया, जो करीब 11.2% है। कांग्रेस और वाम दल भी सीमित संख्या में महिला उम्मीदवारों के साथ मैदान में हैं। इससे साफ है कि टीएमसी इस मामले में आगे दिख रही है, लेकिन बीजेपी अपनी रणनीति से संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है।
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अब सवाल, क्या महिला वोटर बदल देगा खेल
बंगाल में महिला वोटर्स हमेशा निर्णायक भूमिका निभाती रही हैं। यही वजह है कि इस बार पूरी सियासत इसी के इर्द-गिर्द घूम रही है। अब देखना यह है कि क्या बीजेपी की नई रणनीति ममता बनर्जी की मजबूत पकड़ को चुनौती दे पाएगी या फिर टीएमसी अपनी महिला ब्रिगेड के दम पर फिर बढ़त बना लेगी। फिलहाल इतना तय है कि बंगाल का चुनाव अब पूरी तरह ‘महिला वोटर’ के इर्द-गिर्द सिमट चुका है।