विजय हजारे ट्रॉफी 2025–26 में बंगाल की तेज गेंदबाज़ी ने ऐसा तूफान मचाया कि जम्मू कश्मीर की टीम पूरी तरह बिखर गई. घरेलू क्रिकेट में अक्सर बल्लेबाजों की चर्चा होती है, लेकिन इस मुकाबले में गेंदबाज ही असली हीरो बनकर उभरे. खास बात यह रही कि इस तबाही की अगुवाई बिहार से जुड़े दो तेज गेंदबाजों ने की, जिनके साथ अनुभवी मोहम्मद शमी का अनुभव जुड़ा हुआ था. राजकोट की पिच पर जो कुछ हुआ, उसने पूरे देश का ध्यान बंगाल के पेस अटैक की ओर खींच लिया.
शमी ने दिखाई राह
टॉस जीतकर बंगाल ने पहले गेंदबाज़ी चुनी और यह फैसला पूरी तरह सही साबित हुआ. पारी की दूसरी ही गेंद पर मोहम्मद शमी ने ओपनर कमरान इकबाल को पवेलियन भेज दिया. यहीं से जम्मू कश्मीर की बल्लेबाजी की नींव हिल गई. शमी की स्विंग और सीम मूवमेंट ने बल्लेबाजों को खुलकर खेलने का मौका ही नहीं दिया. छह ओवर में दो मेडन और सिर्फ चौदह रन देकर दो विकेट लेकर शमी ने साफ संकेत दे दिया कि वह अब भी उसी धार के साथ गेंदबाजी कर रहे हैं, जिसके लिए उन्हें जाना जाता है.
दो बिहारियों ने तोड़ी कमर
शमी के साथ नई गेंद संभाल रहे आकाशदीप ने अपनी रफ्तार और उछाल से बल्लेबाजों को परेशान किया. पहले ही स्पेल में विकेट निकालकर उन्होंने दबाव और बढ़ा दिया. दूसरी ओर मुकेश कुमार ने अपनी सटीक लाइन लेंथ से जम्मू कश्मीर के बल्लेबाजों को खुलकर खेलने नहीं दिया. इन दोनों बिहारी गेंदबाजों ने मिलकर आठ विकेट झटके. बल्लेबाज या तो गेंद को समझ ही नहीं पाए या फिर जल्दबाजी में गलत शॉट खेल बैठे. पूरी टीम सिर्फ 63 रन पर ढेर हो गई, जो उनका अब तक का सबसे कम लिस्ट ए स्कोर है.
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पूरे देश में चर्चा
इस प्रदर्शन के बाद बंगाल की तेज गेंदबाज़ी पूरे भारतीय क्रिकेट में चर्चा का विषय बन गई है. कप्तान अभिमन्यु ईश्वरन की रणनीति और गेंदबाजों का अनुशासन साफ नजर आया. खास तौर पर आकाशदीप और मुकेश कुमार ने यह साबित कर दिया कि बिहार की मिट्टी में तेज गेंदबाज़ी की जबरदस्त ताकत है. वहीं मोहम्मद शमी का अनुभव इस आक्रमण की रीढ़ बना रहा. इस मुकाबले ने यह भी साफ कर दिया कि अगर यह पेस अटैक इसी लय में रहा, तो बंगाल विजय हजारे ट्रॉफी की सबसे खतरनाक टीमों में शामिल हो सकता है.