Bengaluru Parking Rules : बेंगलुरु में रहने वाले वाहन मालिकों के लिए पार्किंग से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। कर्नाटक सरकार ने ग्रेटर बेंगलुरु एरिया पार्किंग नियम, 2026 का मसौदा जारी किया है। इसके तहत सड़क पर वाहन खड़ा करने के लिए लोगों को पहले की तुलना में ज्यादा रकम चुकानी पड़ सकती है। खास बात यह है कि आवासीय इलाकों में पार्किंग परमिट की सालाना फीस वाहन के प्रकार के हिसाब से 15 हजार से 25 हजार रुपये तक प्रस्तावित की गई है। हालांकि, अभी यह अंतिम नियम नहीं है, बल्कि मसौदा है।
किस वाहन के लिए कितनी रकम देनी होगी?
प्रस्तावित नियमों के मुताबिक छोटी कार के लिए सालाना आवासीय पार्किंग परमिट की फीस 15 हजार रुपये रखी जा सकती है। वहीं सेडान कार के लिए यह रकम 20 हजार रुपये और एसयूवी के लिए 25 हजार रुपये तक हो सकती है। यानी बड़ी कार रखने वालों को पार्किंग के लिए ज्यादा भुगतान करना पड़ेगा। सिर्फ सालाना परमिट ही नहीं, बल्कि गैर-आवासीय सड़कों पर प्रति घंटे पार्किंग शुल्क भी प्रस्तावित किया गया है। सड़क की श्रेणी के अनुसार कारों से 40, 60 और 80 रुपये प्रति घंटा तक लिए जा सकते हैं। दोपहिया वाहनों के लिए यही शुल्क 20, 30 और 40 रुपये प्रति घंटा प्रस्तावित है।
इसके अलावा सड़क से बाहर बनी पार्किंग में शुल्क अपेक्षाकृत कम रखने का प्रस्ताव है। वहां कारों के लिए 20 से 40 रुपये और दोपहिया वाहनों के लिए 10 से 20 रुपये प्रति घंटा शुल्क हो सकता है। मासिक पार्किंग की दर 1,000 से 4,000 रुपये के बीच प्रस्तावित है।
क्यों लाई जा रही है नई पार्किंग व्यवस्था?
बेंगलुरु में बढ़ती गाड़ियों और सीमित सड़क स्थान के कारण पार्किंग लंबे समय से बड़ी समस्या बनी हुई है। नई व्यवस्था का उद्देश्य सड़क किनारे लंबे समय तक वाहन खड़ा करने की प्रवृत्ति को कम करना और उपलब्ध जगह का बेहतर इस्तेमाल करना है। कर्नाटक की मौजूदा पार्किंग नीति भी मुफ्त पार्किंग से भुगतान वाली और अव्यवस्थित पार्किंग से व्यवस्थित पार्किंग की ओर बढ़ने पर जोर देती है। प्रस्ताव में लंबे समय तक सड़क पर वाहन खड़ा करने पर शुल्क बढ़ाने की बात भी कही गई है। इसका मकसद लोगों को सड़क के बजाय निर्धारित पार्किंग स्थलों का इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित करना है।
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हालांकि, फिलहाल वाहन मालिकों को तुरंत 25 हजार रुपये देने की जरूरत नहीं है। यह प्रस्तावित नियम हैं और अंतिम रूप दिए जाने से पहले इन पर सुझाव और आपत्तियां मांगी जाएंगी। इसलिए असली शुल्क और नियम अंतिम अधिसूचना के बाद ही स्पष्ट होंगे।