Exercise Timing Trend : व्यायाम को लेकर अब सिर्फ यह मायने नहीं रखता कि आप कितना और कौन-सा व्यायाम करते हैं, बल्कि यह भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है कि आप किस समय कसरत करते हैं। शरीर की प्राकृतिक जैविक घड़ी यानी सर्केडियन रिद्म के साथ तालमेल बैठाकर व्यायाम करने का चलन तेजी से चर्चा में है। इसका मकसद शरीर पर अतिरिक्त दबाव डालने के बजाय उसकी प्राकृतिक ऊर्जा और सक्रियता के अनुसार कसरत का समय चुनना है।
सुबह की कसरत क्यों मानी जाती है खास?
सुबह का समय हल्की से मध्यम कसरत के लिए अच्छा विकल्प हो सकता है। तेज चाल से चलना, योग, स्ट्रेचिंग, साइकिल चलाना या हल्की दौड़ जैसी गतिविधियां दिन की शुरुआत को सक्रिय बना सकती हैं। सुबह व्यायाम करने से नियमित दिनचर्या बनाने में भी मदद मिलती है, क्योंकि दिन की व्यस्तता शुरू होने से पहले ही कसरत पूरी हो जाती है। हालांकि, सुबह उठते ही बहुत कठिन व्यायाम शुरू करने के बजाय शरीर को धीरे-धीरे सक्रिय करना बेहतर माना जाता है। कुछ लोगों को सुबह के समय शरीर में जकड़न या कम ऊर्जा महसूस हो सकती है, इसलिए उनके लिए वार्म-अप जरूरी हो जाता है।
शाम की वॉक का अपना फायदा
अगर सुबह समय नहीं मिल पाता तो शाम की सैर भी एक अच्छा विकल्प हो सकती है। दिनभर बैठकर काम करने के बाद 30 से 45 मिनट की तेज चाल वाली वॉक शरीर को सक्रिय करने के साथ मानसिक थकान कम करने में मदद कर सकती है। शाम का समय उन लोगों के लिए भी सुविधाजनक हो सकता है जिन्हें सुबह उठकर व्यायाम करने में परेशानी होती है। सबसे जरूरी बात यह है कि गतिविधि ऐसी हो जिसे लंबे समय तक नियमित रूप से जारी रखा जा सके।
इसे भी पढ़ें : मेहनत नहीं, अब आराम बना सेहत का नया रुतबा
हर शरीर की घड़ी अलग होती है
व्यायाम का कोई एक समय सभी के लिए सही नहीं हो सकता। किसी व्यक्ति को सुबह अधिक ऊर्जा महसूस होती है, जबकि किसी दूसरे के लिए शाम का समय बेहतर हो सकता है। नींद, काम का समय, खान-पान और रोजमर्रा की दिनचर्या भी इसमें भूमिका निभाते हैं। इसलिए शरीर की घड़ी के अनुसार व्यायाम करने का नया चलन दरअसल समय की पाबंदी से ज्यादा शरीर को समझने की कोशिश है। सही समय वही है, जब आप आरामदायक महसूस करें और नियमित रूप से सक्रिय रह सकें।