
भाद्रपद मास की अमावस्या तिथि हिंदू पंचांग में अत्यंत पुण्यदायक मानी जाती है। यह दिन पितृ तर्पण, दान-पुण्य और नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति के लिए विशेष होता है। वर्ष 2025 में भाद्रपद अमावस्या एक शुभ योग लेकर आ रही है, जो न सिर्फ पूर्वजों को श्रद्धांजलि देने का अवसर है, बल्कि जीवन में खुशहाली और समृद्धि लाने का भी खास दिन है।
भाद्रपद अमावस्या का महत्व
अमावस्या तिथि को चंद्रमा पूर्ण रूप से लुप्त हो जाता है, जिससे यह दिन आत्मशुद्धि, ध्यान, साधना और पितृ कार्यों के लिए श्रेष्ठ माना जाता है। भाद्रपद अमावस्या विशेष रूप से उन लोगों के लिए फलदायक होती है जो जीवन में स्थायी सुख, मानसिक शांति और पारिवारिक समृद्धि की कामना करते हैं।
क्या करें इस अमावस्या पर?
शास्त्रों के अनुसार, यदि भाद्रपद अमावस्या के दिन कुछ विशेष उपाय कर लिए जाएं तो जीवन में चल रही परेशानियां दूर हो सकती हैं और भविष्य सुखमय बन सकता है। यह उपाय कठिन नहीं, बल्कि अत्यंत सरल होते हैं जिन्हें कोई भी व्यक्ति घर पर कर सकता है।
ये छोटा सा उपाय बदल सकता है आपकी किस्मत
इस दिन सुबह स्नान के बाद पीपल के वृक्ष के नीचे दीपक जलाएं और काले तिल, जल और दूध अर्पित करें। इसके साथ ही पितरों के नाम का तर्पण करें और ‘ॐ पितृदेवाय नमः’ मंत्र का जाप करें। इसके बाद गरीबों को अन्न, वस्त्र या तिल दान करें। मान्यता है कि यह छोटा-सा कार्य व्यक्ति के पितृ दोष को दूर करता है और जीवन में कभी धन और संतोष की कमी नहीं होती।
अन्य उपाय जो लाते हैं सौभाग्य
घर में गंगाजल का छिड़काव करें ताकि नकारात्मक ऊर्जा दूर हो।
पीपल के पेड़ पर मीठा जल चढ़ाएं और सात परिक्रमा करें।
शाम के समय घर के ईशान कोण (पूर्वोत्तर दिशा) में दीपक जलाएं।
चंद्रमा को अर्घ्य दें और मनोकामना पूर्ति की प्रार्थना करें।