सावन का पहला सोमवार शिवभक्तों के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन व्रत, उपवास और विशेष पूजन से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है। लेकिन इस वर्ष सावन के पहले सोमवार को भद्राकाल का साया पड़ रहा है, जिससे पूजा-पाठ के समय विशेष सावधानी बरतनी जरूरी हो गई है।
भद्रा, पंचांग के अनुसार, अशुभ काल माना जाता है। इस दौरान किए गए शुभ कार्यों का फल अनुकूल नहीं होता। इसलिए शिव पूजा जैसे महत्वपूर्ण अनुष्ठान के लिए भद्रा काल में पूजा करना वर्जित माना जाता है। इस दिन भगवान शिव की आराधना से पहले मुहूर्त का ध्यान रखना अत्यंत आवश्यक है।
क्या करें उपाय
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस वर्ष सावन का पहला सोमवार भद्रा के साये में आरंभ होगा। भद्रा काल सुबह से दोपहर तक प्रभावी रहेगा। शुभ पूजा का समय भद्रा समाप्त होने के बाद शुरू होगा। अतः भक्तों को सलाह दी जाती है कि वे पूजा और जलाभिषेक भद्रा समाप्त होने के बाद ही करें। इससे न केवल पूजा का पूर्ण फल प्राप्त होगा, बल्कि नकारात्मक प्रभावों से भी बचा जा सकेगा।यदि आप व्रत रख रहे हैं, तो दिनभर भगवान शिव का ध्यान करें, ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करें, लेकिन पूजा विधिवत केवल शुभ मुहूर्त में ही करें।
सावन के प्रत्येक सोमवार का होता है विशेष महत्व
सावन में प्रत्येक सोमवार का विशेष महत्व होता है, लेकिन पहले सोमवार की पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है। अतः शुभ मुहूर्त में पूजा करके आप भगवान शिव की विशेष कृपा पा सकते हैं।सावन सोमवार को भद्रा के साये में भूलकर भी पूजा न करें। शुभ मुहूर्त की प्रतीक्षा करें और तभी भगवान शिव का अभिषेक करें। यह आपके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लाएगा।