सोशल मीडिया पर अपनी अलग पहचान बनाने वाले रमाशंकर : सोशल मीडिया पर अपनी अनोखी शैली और सरल अंदाज से लोगों का ध्यान खींचने वाले रमाशंकर गुप्ता अब इस दुनिया में नहीं रहे. “भंडारा करा दो बाबू जी” कहकर लोगों से अपील करने वाले उनके वीडियो पिछले कुछ समय से इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रहे थे। उनके निधन की खबर सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में लोगों ने दुख व्यक्त किया और उनके पुराने वीडियो साझा करते हुए श्रद्धांजलि दी। कई यूजर्स ने लिखा कि उनकी सहज मुस्कान और लोगों से बात करने का तरीका हमेशा याद रहेगा.
हर की पौड़ी पर करते थे भंडारे की व्यवस्था
रमाशंकर गुप्ता उत्तराखंड के हरिद्वार स्थित हर की पौड़ी क्षेत्र में साधु-संतों और जरूरतमंद लोगों के लिए भोजन की व्यवस्था कराने का काम करते थे। वे आने वाले श्रद्धालुओं से भंडारा कराने की अपील करते थे और इच्छुक लोगों की ओर से भोजन की व्यवस्था करवाते थे। इसके बदले वे निर्धारित राशि लेते थे, लेकिन लोगों का ध्यान सबसे अधिक उनके बोलने के अंदाज और विनम्र व्यवहार ने खींचा। यही वजह रही कि उनके छोटे-छोटे वीडियो लाखों लोगों तक पहुंचे और वे सोशल मीडिया पर एक चर्चित चेहरा बन गए.
अनोखे अंदाज ने दिलाई लोकप्रियता
रमाशंकर की पहचान किसी बड़े मंच या प्रचार से नहीं, बल्कि उनके सहज और वास्तविक व्यक्तित्व से बनी। कैमरे के सामने वे बिना किसी बनावट के लोगों से कहते थे, “भंडारा करा दो बाबू जी,” और यही वाक्य उनकी पहचान बन गया। इंटरनेट पर उनके वीडियो को लाखों बार देखा गया। कई लोगों ने उनके प्रयासों की सराहना की और भंडारे में सहयोग भी किया। उनकी लोकप्रियता इस बात का उदाहरण बनी कि सादगी और ईमानदारी से भी लोगों के दिलों तक पहुंचा जा सकता है.
निधन की खबर से भावुक हुए प्रशंसक
जैसे ही उनके निधन की जानकारी सामने आई, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर शोक संदेशों की बाढ़ आ गई। अनेक लोगों ने उनके साथ जुड़ी यादें साझा कीं और पुराने वीडियो दोबारा पोस्ट किए। कुछ यूजर्स ने लिखा कि वे जब भी हरिद्वार जाते थे, रमाशंकर से जरूर मिलते थे। वहीं कई लोगों ने उनके कार्यों को याद करते हुए कहा कि उन्होंने भंडारे जैसी सेवा को अपने अलग अंदाज से लोगों तक पहुंचाया.
सादगी भरी पहचान छोड़ गए रमाशंकर
रमाशंकर गुप्ता भले ही किसी बड़े पद या प्रसिद्धि के कारण चर्चा में नहीं आए, लेकिन उनकी सहज अपील और सेवा से जुड़ा काम लोगों के बीच उन्हें अलग पहचान दिला गया। उनका जीवन यह दिखाता है कि सामान्य व्यक्ति भी अपने व्यवहार और कार्यों से लाखों लोगों के दिलों में जगह बना सकता है। उनके निधन के बाद इंटरनेट पर साझा किए जा रहे वीडियो इस बात का प्रमाण हैं कि उन्होंने अपनी सरल शैली से लोगों पर गहरी छाप छोड़ी। अब उनके चाहने वाले उन्हें उनकी मुस्कान, विनम्रता और “भंडारा करा दो बाबू जी” वाली पहचान के साथ लंबे समय तक याद रखेंगे.