Bharat mostpowerful electric rail engine :देश की रेल प्रणाली अब और अधिक ताकतवर और आत्मनिर्भर होने जा रही है। भारत का अब तक का सबसे शक्तिशाली स्वदेशी इलेक्ट्रॉनिक रेल इंजन बनकर तैयार हो चुका है। 9000 हॉर्सपावर की क्षमता से लैस यह इंजन न केवल भारी मालगाड़ियों को खींचने में सक्षम है, बल्कि लंबी दूरी की यात्री ट्रेनों में भी इसका उपयोग किया जा सकेगा। जल्द ही यह इंजन भोपाल रेल मंडल में ट्रायल रन के दौरान पटरियों पर दौड़ता नजर आएगा।
स्वदेशी तकनीक से बना ताकतवर इंजन
इस शक्तिशाली इलेक्ट्रिक इंजन का निर्माण ‘मेक इन इंडिया’ अभियान के अंतर्गत गुजरात के दाहोद में किया गया है। 9000 हॉर्सपावर की क्षमता से युक्त यह इंजन भारतीय रेल की ताकत को नई ऊंचाइयों पर ले जाने वाला है। यह इंजन अकेले 130 वैगन वाली भारी मालगाड़ी को खींचने में सक्षम है। इतना ही नहीं, यह 26 से 28 कोच वाली लंबी दूरी की यात्री ट्रेनों को भी आसानी से संचालित कर सकता है।
भोपाल, जबलपुर और कोटा में होगा ट्रायल
यह स्वदेशी इंजन पश्चिम मध्य रेलवे के तीन महत्वपूर्ण रेल मंडलों - भोपाल, जबलपुर और कोटा में 15 दिनों तक ट्रायल रन पर रहेगा। इस दौरान इसकी खींचने की क्षमता, स्पीड और तकनीकी मजबूती का आकलन किया जाएगा। सफल ट्रायल के बाद इसे माल और यात्री ट्रेनों में नियमित रूप से शामिल किया जाएगा।
भारत दुनिया के ताकतवर देशों की सूची में शामिल
अब भारत भी उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है जो सबसे ताकतवर रेल इंजन का निर्माण करते हैं। इससे पहले केवल रूस, चीन, फ्रांस, जर्मनी और स्वीडन ही 12,000 हॉर्सपावर क्षमता वाले इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव बनाते थे। भारत ने इस दौड़ में न केवल स्थान बनाया है, बल्कि ब्रॉड गेज ट्रैक पर WAG12B जैसे शक्तिशाली इंजन को दौड़ाने वाला पहला देश भी बन गया है।
भविष्य
में तैयार होंगे 800 इंजन
सरकार का लक्ष्य ऐसे 800 पावरफुल इलेक्ट्रिक इंजन तैयार करने का है जो पूरी तरह से बिजली से संचालित होंगे। इन इंजनों का उपयोग देशभर में माल और यात्री रेल सेवाओं को आधुनिक, तेज और प्रदूषण रहित बनाने के लिए किया जाएगा। यह भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता और रेलवे के डिजिटलीकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम है।