केंद्र सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र की दो बड़ी कंपनियों BHEL और SAIL को एक साल के भीतर प्रदर्शन सुधारने का निर्देश दिया है। यदि दोनों कंपनियां तय मानकों को पूरा नहीं कर पाती हैं तो उनका महारत्न दर्जा वापस लेकर उन्हें नवरत्न श्रेणी में रखा जा सकता है। यह पहली बार है जब किसी महारत्न कंपनी को दर्जा घटाने की चेतावनी दी गई है।
क्यों आई यह स्थिति?
सरकारी समीक्षा में पाया गया कि दोनों कंपनियां पिछले तीन वर्षों में 5,000 करोड़ रुपये के औसत वार्षिक शुद्ध लाभ का लक्ष्य हासिल नहीं कर सकीं। महारत्न दर्जा बनाए रखने के लिए यह एक जरूरी शर्त है। देश की 14 महारत्न कंपनियों में केवल यही दो कंपनियां इस मानक पर खरा नहीं उतर सकीं।
महारत्न बने रहने के नियम
महारत्न कंपनियों के लिए केवल लाभ ही नहीं बल्कि कई अन्य शर्तें भी तय हैं। इनमें 25,000 करोड़ रुपये से अधिक का औसत वार्षिक कारोबार, 15,000 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति और मजबूत वैश्विक उपस्थिति शामिल है। हालांकि BHEL और SAIL इन अधिकांश मानकों को पूरा करती हैं, लेकिन लाभ के मोर्चे पर पिछड़ने से संकट खड़ा हुआ है।
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दर्जा घटने का क्या होगा असर?
यदि महारत्न का दर्जा छिनता है तो दोनों कंपनियों की वित्तीय स्वतंत्रता कम हो जाएगी। अभी महारत्न कंपनियां सरकार की मंजूरी के बिना 5,000 करोड़ रुपये तक निवेश कर सकती हैं, जबकि नवरत्न कंपनियों के लिए यह सीमा केवल 1,000 करोड़ रुपये है। इससे बड़े निवेश और विस्तार योजनाओं पर असर पड़ सकता है।
सरकार ने मांगा सुधार प्लान
भारी उद्योग मंत्रालय और इस्पात मंत्रालय को दोनों कंपनियों के लिए विस्तृत सुधार योजना तैयार करने का निर्देश दिया गया है। SAIL का कारोबार और संपत्ति मजबूत बनी हुई है, लेकिन स्टील कीमतों में उतार-चढ़ाव से लाभ प्रभावित हुआ है। वहीं BHEL के मामले में मानव संसाधन नीतियों को प्रमुख चुनौती माना गया है, जिनमें सुधार की जरूरत बताई गई है।
नियमों की होगी नई समीक्षा
नीति आयोग का मानना है कि महारत्न दर्जे के लिए तय मानदंड वर्ष 2010 से नहीं बदले हैं। बदलती आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए सरकार अब इन मानकों की दोबारा समीक्षा कर सकती है। इसके बाद सभी सरकारी कंपनियों का पुनर्मूल्यांकन किया जाएगा। फिलहाल BHEL और SAIL के पास अपना महारत्न दर्जा बचाने के लिए एक साल का समय है।