धार। मध्यप्रदेश के बहुचर्चित भोजशाला विवाद में इंदौर हाईकोर्ट में हुई सुनवाई ने मामले को निर्णायक मोड़ पर ला दिया है। गुरुवार को हुई सुनवाई में सभी 9 पक्षों की दलीलें सुनी गईं और अदालत ने 6 अप्रैल से लगातार सुनवाई करने का फैसला लिया है। हिंदू और मुस्लिम पक्ष के वरिष्ठ वकीलों ने अपने-अपने दावे मजबूती से रखे, वहीं कोर्ट ने सबूतों के आधार पर आगे की प्रक्रिया तय करने के संकेत दिए हैं।
दोनों पक्षों के दिग्गज वकील कोर्ट में आमने-सामने
सुनवाई के दौरान हिंदू पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता Vishnu Shankar Jain पेश हुए, जबकि मुस्लिम पक्ष का प्रतिनिधित्व Salman Khurshid ने किया। दोनों पक्षों ने भोजशाला के धार्मिक स्वरूप को लेकर अपने-अपने तर्क अदालत के समक्ष रखे। बहस के दौरान ऐतिहासिक और धार्मिक साक्ष्यों पर विशेष जोर दिया गया।
डबल बेंच में हुई सुनवाई, अंतिम चरण में पहुंचा मामला
यह सुनवाई इंदौर हाईकोर्ट की डबल बेंच, जिसमें न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक कुमार अवस्थी शामिल हैं, के समक्ष हुई। वर्ष 2022 से लंबित इस मामले में अब अंतिम चरण की कार्यवाही चल रही है। कोर्ट के समक्ष तीन याचिकाएं और एक आपत्ति लंबित हैं, जिनका निराकरण किया जाना है।
एएसआई रिपोर्ट बनी अहम आधार
मामले में आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (ASI) द्वारा किया गया वैज्ञानिक सर्वेक्षण पहले ही हाईकोर्ट में प्रस्तुत किया जा चुका है। इस रिपोर्ट को रिकॉर्ड में लिया गया है और अब इसे ही सुनवाई के दौरान एक महत्वपूर्ण साक्ष्य के रूप में देखा जा रहा है। कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष द्वारा प्रस्तुत फोटो और वीडियो साक्ष्यों को भी अगली सुनवाई में विस्तार से देखने के निर्देश दिए हैं।
धार्मिक पहचान को लेकर टकराव
भोजशाला के स्वरूप को लेकर दोनों पक्षों के दावे पूरी तरह विपरीत हैं। हिंदू पक्ष इसे मां सरस्वती का प्राचीन मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे मस्जिद बताता है। यही विवाद इस मामले का मूल है, जिस पर अदालत को अब अंतिम निर्णय देना है।
सुप्रीम कोर्ट ने भी हाईकोर्ट को माना उचित मंच
इस मामले को लेकर दोनों पक्ष सुप्रीम कोर्ट भी पहुंचे थे। हालांकि शीर्ष अदालत ने हस्तक्षेप से इनकार करते हुए स्पष्ट किया कि सभी साक्ष्य और आपत्तियां हाईकोर्ट में ही प्रस्तुत की जाएं। सुप्रीम कोर्ट के इस रुख के बाद अब पूरी सुनवाई का केंद्र इंदौर हाईकोर्ट बन गया है।