धार की ऐतिहासिक भोजशाला को लेकर चल रहे बहुचर्चित विवाद में अब एक नया मोड़ आ गया है। इंदौर स्थित हाईकोर्ट की खंडपीठ ने स्पष्ट किया है कि अदालत स्वयं भोजशाला परिसर का निरीक्षण करेगी ताकि वास्तविक स्थिति को प्रत्यक्ष रूप से समझा जा सके। सोमवार को करीब डेढ़ घंटे चली सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की दलीलें सुनी गईं। कोर्ट ने यह भी तय किया कि इस मामले में 2 अप्रैल से लगातार सुनवाई की जाएगी।
एएसआई रिपोर्ट पर हुई विस्तृत बहस
सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान अदालत में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा कराए गए वैज्ञानिक सर्वे की रिपोर्ट को लेकर दोनों पक्षों के बीच विस्तृत बहस हुई। कोर्ट ने पहले ही सभी पक्षकारों से कहा था कि वे सर्वे रिपोर्ट का अध्ययन कर अपने दावे, आपत्तियां और सुझाव अदालत में प्रस्तुत करें। इसी आधार पर हिंदू और मुस्लिम पक्ष सहित अन्य प्रतिवादियों ने अलग-अलग आवेदन और आपत्तियां दाखिल कीं, जिन पर खंडपीठ के समक्ष विस्तार से चर्चा हुई।
कोर्ट खुद करेगी स्थल का निरीक्षण
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि मामले की संवेदनशीलता और ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए न्यायालय स्वयं भोजशाला परिसर का निरीक्षण करेगा। अदालत 2 अप्रैल से पहले स्थल पर जाकर वास्तविक स्थिति का अवलोकन करेगी। माना जा रहा है कि इससे कोर्ट को विवाद से जुड़े तथ्यों को समझने में मदद मिलेगी और आगे की सुनवाई में स्पष्टता आएगी।
पिछले साल दिए गए थे सर्वे के आदेश
दरअसल यह पूरा मामला उस आदेश से जुड़ा है, जिसमें 22 मार्च 2024 को हाईकोर्ट ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को भोजशाला परिसर का वैज्ञानिक सर्वे करने के निर्देश दिए थे। अदालत का उद्देश्य यह जानना था कि परिसर की ऐतिहासिक संरचना और वास्तविक स्वरूप क्या है। इस आदेश के बाद सर्वे की प्रक्रिया शुरू हुई।
करीब 100 दिनों तक चला वैज्ञानिक सर्वे
एएसआई ने लगभग 100 दिनों तक विस्तृत सर्वे किया। इस दौरान ग्राउंड पेनिट्रेटिंग रडार तकनीक, सीमित खुदाई, संरचनात्मक परीक्षण और ऐतिहासिक अवशेषों के अध्ययन जैसी कई वैज्ञानिक विधियों का उपयोग किया गया। सर्वे के बाद तैयार रिपोर्ट अदालत के समक्ष पेश की गई, जिस पर अब पक्षकार अपनी-अपनी दलीलें दे रहे हैं।
दोनों पक्षों के अलग-अलग दावे
सर्वे के दौरान मिले अवशेषों को लेकर दोनों पक्षों की व्याख्या अलग-अलग सामने आई है। हिंदू पक्ष का कहना है कि परिसर में मंदिर से जुड़े प्रमाण मिले हैं, जबकि मुस्लिम पक्ष ने रिपोर्ट के कई निष्कर्षों पर सवाल उठाए हैं। इसी कारण अदालत ने सभी पक्षों को विस्तृत आपत्तियां और सुझाव देने का अवसर दिया है। अब 2 अप्रैल से शुरू होने वाली लगातार सुनवाई इस लंबे विवाद की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।