धार की ऐतिहासिक भोजशाला को लेकर चल रही कानूनी जंग में बड़ा ट्विस्ट आ गया है। इंदौर खंडपीठ ने मामले को आवश्यक निर्देशों के लिए मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को सौंप दिया है। अब वही तय करेंगे कि इस संवेदनशील प्रकरण की सुनवाई किस पीठ के सामने होगी। साथ ही, एएसआइ की सीलबंद सर्वे रिपोर्ट को खुली अदालत में पेश करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
हाईकोर्ट से चीफ जस्टिस के पास पहुंचा मामला
इंदौर स्थित Madhya Pradesh High Court की युगलपीठ ने सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का हवाला देते हुए याचिका को चीफ जस्टिस के समक्ष भेज दिया। अब 18 फरवरी को अगली सुनवाई प्रस्तावित है। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस मामले की सुनवाई ऐसी पीठ करे जिसकी अध्यक्षता चीफ जस्टिस या वरिष्ठतम न्यायाधीश करें।
तीन हफ्तों में सुनवाई और ASI रिपोर्ट सार्वजनिक करने का निर्देश
शीर्ष अदालत के निर्देशानुसार लंबित याचिका को तीन सप्ताह के भीतर डिवीजन बेंच के सामने सुना जाना है। साथ ही Archaeological Survey of India (एएसआइ) की सीलबंद रिपोर्ट को खुली अदालत में खोला जाएगा। कोर्ट ने कहा है कि रिपोर्ट की प्रतियां दोनों पक्षों को उपलब्ध कराई जाएं और यदि कोई हिस्सा कॉपी योग्य न हो, तो विशेषज्ञों की मौजूदगी में निरीक्षण की अनुमति दी जाए।
आपत्तियों के लिए दो सप्ताह का समय
अदालत ने निर्देश दिया है कि रिपोर्ट मिलने के बाद संबंधित पक्षों को दो सप्ताह का समय दिया जाए, ताकि वे अपनी आपत्तियां, सुझाव या सिफारिशें पेश कर सकें। इसके बाद डिवीजन बेंच अंतिम सुनवाई करेगी। 7 अप्रैल 2003 के एएसआइ आदेश से जुड़ी लंबित अपील को भी इसी के साथ जोड़ा जाएगा।
मंदिर या मस्जिद? रिपोर्ट पर टिकी नजरें
विवाद का मूल प्रश्न यह है कि भोजशाला सरस्वती मंदिर है या कमाल मौला मस्जिद। इसी मुद्दे पर एएसआइ ने सर्वे कर रिपोर्ट तैयार की थी, जिसे हाईकोर्ट में सीलबंद लिफाफे में जमा किया गया है। सोमवार को इसके खुलने की संभावना थी, लेकिन अब यह प्रक्रिया अगली सुनवाई में होगी। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद यह रिपोर्ट मामले की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती है।