धार स्थित भोजशाला परिसर में शनिवार को एक चौंकाने वाला घटनाक्रम सामने आया। अज्ञात व्यक्ति या समूह द्वारा गर्भगृह में मां वाग्देवी की अष्टधातु प्रतिमा स्थापित कर दी गई, जबकि परिसर में सुरक्षा के कई स्तर मौजूद हैं। शाम को जानकारी मिलने पर एएसआई ने प्रतिमा को हटवा दिया। इस घटना ने सुरक्षा व्यवस्था, निगरानी तंत्र और संवेदनशील परिसर में नियंत्रण को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
गर्भगृह में प्रतिमा स्थापना से मचा हड़कंप
शनिवार दोपहर भोजशाला परिसर में अचानक मां वाग्देवी की अष्टधातु प्रतिमा दिखाई देने से प्रशासनिक हलकों में हलचल मच गई। प्रतिमा गर्भगृह में स्थापित की गई थी और उसके सामने पुष्प, अक्षत सहित पूजन सामग्री भी रखी गई थी। इससे संकेत मिले कि प्रतिमा स्थापित करने के बाद वहां पूजा-अर्चना भी की गई। हालांकि यह पूरा घटनाक्रम किसने और कब अंजाम दिया, इसकी जानकारी तत्काल किसी के पास नहीं थी।
शाम को एएसआई ने हटवाई प्रतिमा
मामले की जानकारी शाम करीब साढ़े छह बजे अधिकारियों तक पहुंची। इसके बाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की टीम मौके पर पहुंची और निर्धारित नियमों के तहत प्रतिमा को वहां से हटवा दिया। अधिकारियों ने पूरे घटनाक्रम की जानकारी जुटाने की प्रक्रिया शुरू की है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि प्रतिमा को परिसर में कौन लेकर आया और उसे गर्भगृह तक कैसे पहुंचाया गया।
सुरक्षा व्यवस्था पर खड़े हुए सवाल
भोजशाला को संवेदनशील स्थल माना जाता है, जहां पुलिस और एएसआई की निगरानी लगातार रहती है। बाहरी सुरक्षा घेरा, पुलिस चौकी और अंदर तैनात सुरक्षा कर्मियों के बावजूद अष्टधातु की प्रतिमा का परिसर में पहुंचना चर्चा का विषय बन गया है। लोगों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि इतनी बड़ी प्रतिमा बिना किसी की नजर में आए गर्भगृह तक कैसे पहुंच गई।
भोज उत्सव समिति ने किया किनारा
घटना के बाद भोज उत्सव समिति ने स्वयं को इस पूरे मामले से अलग बताया है। समिति के पदाधिकारियों का कहना है कि वे पूर्व में स्थापित प्रतीकात्मक स्वरूप की नियमित पूजा कर रहे हैं और शनिवार को दिखाई दी अष्टधातु प्रतिमा से उनका कोई संबंध नहीं है। समिति ने इस स्थापना में अपनी किसी भी भूमिका से इनकार किया है।
हालिया घटनाओं के बीच बढ़ी संवेदनशीलता
पिछले कुछ समय से भोजशाला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का केंद्र बनी हुई है। न्यायालय के निर्णय, सरस्वती लोक की घोषणा और मां वाग्देवी की मूल प्रतिमा को वापस लाने की मांगों के बीच यह नया घटनाक्रम सामने आया है। खास बात यह भी रही कि घटना वाले दिन ही पुरातत्व विभाग के वरिष्ठ अधिकारी परिसर का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं की समीक्षा कर चुके थे। ऐसे में प्रतिमा स्थापना और सुरक्षा चूक को लेकर कई तरह की चर्चाएं तेज हो गई हैं।