धार भोजशाला विवाद पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच के ऐतिहासिक फैसले के बाद अब वाग्देवी की प्राचीन प्रतिमा को भारत वापस लाने की मांग तेज हो गई है। कोर्ट ने भोजशाला को वाग्देवी मंदिर मानते हुए महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। इसके बाद हिंदू पक्ष वर्षों पुरानी उस मांग को फिर उठा रहा है, जिसमें लंदन के संग्रहालय में रखी गई मां सरस्वती की प्रतिमा को भोजशाला में पुनः स्थापित करने की बात कही जा रही है।
हाईकोर्ट के फैसले ने बढ़ाई उम्मीदें
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने अपने फैसले में भोजशाला को देवी सरस्वती यानी वाग्देवी का मंदिर माना है। कोर्ट ने ऐतिहासिक दस्तावेजों, पुरातात्विक तथ्यों और एएसआई की रिपोर्ट को आधार बनाते हुए यह निर्णय दिया। फैसले के बाद अब प्रतिमा वापसी की मांग को नई मजबूती मिली है।
117 साल से लंदन में रखी है प्रतिमा
बताया जाता है कि वाग्देवी की दुर्लभ प्रतिमा करीब 117 वर्षों से लंदन के ब्रिटिश म्यूजियम में सुरक्षित रखी गई है। यह प्रतिमा ब्रिटिश शासनकाल में धार से ले जाई गई थी। इतिहासकारों के अनुसार इसे अंग्रेजों ने खुदाई के दौरान प्राप्त किया था और बाद में लंदन भेज दिया गया।
सरकार कूटनीतिक स्तर पर कर सकती है पहल
विदेशों में मौजूद भारतीय धरोहरों को वापस लाने के लिए भारत सरकार पहले भी कई प्रयास कर चुकी है। एएसआई और विदेश मंत्रालय के सहयोग से अनेक प्राचीन मूर्तियां और ऐतिहासिक वस्तुएं भारत लौटाई जा चुकी हैं। ऐसे में वाग्देवी प्रतिमा को वापस लाने के लिए भी कानूनी और कूटनीतिक स्तर पर पहल संभव मानी जा रही है।
हिंदू पक्ष लंबे समय से उठा रहा मांग
भोजशाला से जुड़े संगठनों और हिंदू पक्ष की ओर से लंबे समय से यह मांग उठाई जाती रही है कि मां सरस्वती की मूल प्रतिमा को वापस भारत लाया जाए। अब हाईकोर्ट के फैसले के बाद यह मुद्दा फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है।
कांच के बॉक्स में सुरक्षित रखी गई प्रतिमा
लंदन के संग्रहालय में यह प्रतिमा विशेष सुरक्षा के बीच कांच के बॉक्स में रखी गई है। प्रतिमा को देखने की अनुमति तो है, लेकिन उसे छूने की इजाजत नहीं दी जाती। इसे भारतीय इतिहास और संस्कृति की महत्वपूर्ण धरोहर माना जाता है।