मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद परिसर को लेकर हाई कोर्ट के फैसले ने देशभर में नई बहस छेड़ दी है। कोर्ट ने परिसर को मां सरस्वती का मंदिर माना, जिसके बाद राजनीतिक और धार्मिक संगठनों की तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। एक तरफ हिंदू संगठन और बीजेपी नेता फैसले का स्वागत कर रहे हैं, वहीं मुस्लिम पक्ष और कई विपक्षी नेता इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी में हैं।
ओवैसी ने फैसले पर उठाए सवाल
AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने हाई कोर्ट के फैसले का विरोध करते हुए कहा कि यह परिसर पिछले कई सौ वर्षों से मस्जिद के रूप में मौजूद है। उन्होंने दावा किया कि इससे जुड़े ऐतिहासिक दस्तावेज, वक्फ रिकॉर्ड और कानूनी तथ्यों को नजरअंदाज किया गया है। ओवैसी ने कहा कि मुस्लिम पक्ष अब सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएगा और उन्हें उम्मीद है कि वहां से राहत मिलेगी।
कांग्रेस ने भी सुप्रीम कोर्ट का रास्ता बताया
कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने कहा कि भोजशाला एक संरक्षित स्मारक है और पूजा-अर्चना या इबादत को लेकर अंतिम निर्णय सुप्रीम कोर्ट को ही करना चाहिए। उन्होंने पुरातत्व सर्वेक्षण से जुड़ी रिपोर्टों पर भी सवाल उठाए और कहा कि पूरे मामले में पारदर्शिता जरूरी है। उनके मुताबिक अभी कानूनी लड़ाई खत्म नहीं हुई है।
संत समाज और हिंदू संगठनों में खुशी
हाई कोर्ट के फैसले के बाद संत समाज और हिंदू संगठनों ने इसे ऐतिहासिक करार दिया है। कई धार्मिक नेताओं ने कहा कि लंबे संघर्ष के बाद यह फैसला आया है। भोज उत्सव समिति से जुड़े लोगों ने भी खुशी जताते हुए कहा कि अब परिसर में बिना किसी बाधा के पूजा-अर्चना हो रही है और आगे धार्मिक गतिविधियां और बढ़ सकती हैं।
उमा भारती बोलीं- ‘फैसले से रोमांचित हूं’
बीजेपी की वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने फैसले का खुलकर स्वागत किया। उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा कि कोर्ट ने सभी तथ्यों को देखने के बाद यह निर्णय दिया है। उन्होंने इसे आस्था और न्याय की जीत बताते हुए फैसले का समर्थन किया।
मुस्लिम पक्ष ने जारी रखी कानूनी लड़ाई
ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने फैसले पर कड़ा विरोध जताया। उन्होंने कहा कि मुस्लिम समाज इस मामले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगा। हालांकि उन्होंने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील भी की। अब पूरे देश की नजर सुप्रीम कोर्ट पर टिकी है, जहां इस विवाद का अगला और अहम अध्याय शुरू हो सकता है।