BHOPAL BHEL LAND : भोपाल में भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (BHEL) की करीब 1100 एकड़ जमीन मध्य प्रदेश सरकार को वापस मिलने की प्रक्रिया आगे बढ़ गई है। पिछले सप्ताह हुई त्रिपक्षीय बैठक में जमीन ट्रांसफर को लेकर अहम सहमति बनी। अब मध्य प्रदेश का राजस्व विभाग और केंद्र का भारी उद्योग मंत्रालय अपने-अपने स्तर पर कैबिनेट के सामने प्रस्ताव रखेंगे। दोनों स्तरों से मंजूरी मिलने के बाद BHEL बोर्ड जमीन ट्रांसफर पर अंतिम फैसला करेगा। जमीन मिलने के बाद इसे चरणबद्ध तरीके से विकसित करने की योजना है।
कैबिनेट मंजूरी के बाद BHEL बोर्ड लेगा अंतिम फैसला
त्रिपक्षीय बैठक में केंद्र सरकार, BHEL दिल्ली-भोपाल और मध्य प्रदेश सरकार के अधिकारी शामिल हुए। राज्य की ओर से राजस्व और नगरीय विकास विभाग के अधिकारियों ने हिस्सा लिया। प्रस्ताव को पहले राज्य और केंद्र की कैबिनेट से मंजूरी दिलाने की प्रक्रिया होगी। इसके बाद BHEL बोर्ड जमीन ट्रांसफर पर अंतिम मुहर लगाएगा।
BHEL के पास 4,479 एकड़ से ज्यादा जमीन
भोपाल में BHEL के पास कुल 4,479.21 एकड़ जमीन बताई गई है। इसमें करीब 600 एकड़ जमीन फैक्ट्री और प्लांट के लिए इस्तेमाल होती है। बाकी हिस्से में टाउनशिप, अर्बन फॉरेस्ट और अन्य क्षेत्र हैं। राज्य को देने की प्रक्रिया में शामिल 1100 एकड़ जमीन का बड़ा हिस्सा खाली है, जबकि कुछ जगहों पर अवैध कब्जे भी बताए गए हैं।
दिल्ली-मुंबई के बड़े प्रोजेक्ट से भी बड़ा क्षेत्र
योजना के मुताबिक 1100 एकड़ का यह क्षेत्र विकसित होने के बाद दिल्ली एनसीआर के एरोसिटी, मुंबई के बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स और गुजरात की गिफ्ट सिटी से भी बड़ा होगा। जमीन का विकास एक साथ नहीं, बल्कि अलग-अलग चरणों में करने की योजना है।
SPV तय करेगी जमीन के विकास की दिशा
जमीन के विकास और प्रोजेक्ट से जुड़े फैसलों के लिए BHEL और राज्य सरकार के अधिकारियों को शामिल कर स्पेशल पर्पज व्हीकल यानी SPV बनाई जाएगी। मोनेटाइजेशन वाली जमीन SPV को ट्रांसफर की जा सकेगी। यही संस्था प्रोजेक्ट और जमीन के विकास से जुड़े फैसले लेगी। काम के लिए केंद्र, राज्य और BHEL की सहमति से NBCC या किसी दूसरी एजेंसी का चयन किया जा सकता है।
कमाई का हिस्सा 50-50% होगा
जमीन के मोनेटाइजेशन से होने वाली आय को लेकर भी व्यवस्था तय की गई है। इससे मिलने वाली राशि BHEL और मध्य प्रदेश सरकार के बीच 50-50 प्रतिशत बांटी जाएगी। इसके साथ जमीन के उपयोग में बदलाव कर इसे योजनाबद्ध तरीके से विकसित किया जाएगा।