दीवाली की रौनक के बाद अब भोपाल में छठ महापर्व की गूंज सुनाई देने लगी है। राजधानी में सूर्य उपासना के इस महापर्व को लेकर तैयारियाँ चरम पर हैं। गोविंदपुरा क्षेत्र में इस बार 51 विशेष कुंड बनाए जा रहे हैं, ताकि छठ व्रती महिलाएं बिना किसी परेशानी के उदयमान और अस्त होते सूर्य को अर्घ्य दे सकें। श्रद्धा, भक्ति और आयोजन का संगम बनने जा रहा है भोपाल का यह छठ पर्व, जहाँ प्रशासन और स्थानीय समितियाँ पूरी तत्परता से जुटी हैं।
भोपाल में छठ की भव्य तैयारी, हर कुंड में झलकेगी आस्था
भोपाल में इस वर्ष छठ पूजा को लेकर उत्साह देखते ही बन रहा है। गोविंदपुरा क्षेत्र में करीब 51 कुंडों का निर्माण किया जा रहा है। ये कुंड खास तौर पर इस तरह से बनाए जा रहे हैं कि महिलाएं आसानी से पूजा कर सकें। राजधानी में न केवल गोविंदपुरा, बल्कि हथाईखेड़ा डेम, सरियो सरोवर डेम और शिवनगर स्थित दुर्गा मंदिर कुंडों की भी मरम्मत कर उन्हें सजाया जा रहा है। हर साल की तरह इस बार भी हजारों श्रद्धालु इन घाटों पर जुटने की संभावना है।
त्योहार से पहले सजेगा शहर, दी जाएगी विशेष सुविधाएं
छठ व्रतियों के लिए शहर प्रशासन ने कई सुविधाओं की व्यवस्था की है। इनमें बिजली, पेयजल टैंकर, चेंजिंग रूम, शौचालय और महिला सुरक्षा बल शामिल हैं। हर कुंड पर प्रकाश व्यवस्था, साज-सज्जा, बैरिकेडिंग और सफाई पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। पेड़ों की छँटाई, घास की कटाई और डेकोरेशन का काम तेजी से चल रहा है।
राज्य की पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री कृष्णा गौर ने बताया कि तैयारियों की समीक्षा बैठक में हर छोटे-बड़े मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की गई है ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
आस्था का महापर्व: सूर्य को अर्घ्य देने की अनोखी परंपरा
छठ पर्व का महत्व सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक रूप से भी गहरा है। सूर्योपासना का यह पर्व दीवाली के छह दिन बाद मनाया जाता है और इस बार 25 अक्टूबर से 28 अक्टूबर 2025 तक इसका आयोजन रहेगा।
इस दौरान महिलाएं कठोर व्रत रखती हैं और सूर्य देव से अपने परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। भोपाल के घाटों पर सूर्यास्त और सूर्योदय के समय जब व्रती अर्घ्य देती हैं, तो वह दृश्य पूरे शहर को आस्था के रंग में रंग देता है।
भोपाल में अब पूर्वांचल की छठ संस्कृति का बसेरा
कभी यूपी-बिहार तक सीमित यह पर्व अब पूरे देश और विदेशों में मनाया जाने लगा है। भोपाल में छठ का आयोजन अब एक संस्कृति उत्सव का रूप ले चुका है, जहाँ हर धर्म और क्षेत्र के लोग शामिल होकर इस महापर्व को मिल-जुलकर मनाते हैं।गोविंदपुरा, भेल क्षेत्र, और कोलार रोड से लेकर बैरागढ़ तक श्रद्धालुओं की सहभागिता इस पर्व को और भी भव्य बना रही है।