भोपाल के एक प्रमुख अस्पताल में इलाजरत तीन वर्षीय कैंसर पीड़ित बच्चे की मौत के मामले ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच में सामने आया है कि उपचार के दौरान बच्चे को दवा के बजाय एक खतरनाक रसायन इंजेक्ट कर दिया गया, जिससे उसकी तबीयत अचानक बिगड़ गई। घटना के बाद हुई जांच में लापरवाही की पुष्टि होने पर दो नर्सिंग कर्मियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।
इलाज के लिए भर्ती था मासूम
जानकारी के अनुसार सागर जिले के रहने वाले तीन वर्षीय सार्थक यादव को ब्लड कैंसर के इलाज के लिए दिसंबर 2025 में अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बच्चे का उपचार चल रहा था और वह चिकित्सकीय निगरानी में था। परिजनों को उम्मीद थी कि इलाज के बाद उसकी स्थिति में सुधार होगा, लेकिन एक गंभीर चूक ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया।
सिरिंज में रखा गया था खतरनाक रसायन
जांच में सामने आया कि बायोप्सी सैंपल सुरक्षित रखने के लिए उपयोग किए जाने वाले फॉर्मेलिन नामक रसायन को सिरिंज में भरकर वार्ड में रखा गया था। आरोप है कि इसे निर्धारित सुरक्षा मानकों के अनुसार सुरक्षित स्थान पर नहीं रखा गया। यही सिरिंज बाद में उपचार के दौरान उपयोग में आ गई।
परिजनों की चेतावनी भी अनसुनी रही
बताया गया है कि बच्चे की नस में इंजेक्शन लगाने से पहले उसके पिता ने कई बार संदेह जताते हुए नर्सिंग स्टाफ को सावधान किया था। इसके बावजूद बिना पर्याप्त जांच के सिरिंज का इस्तेमाल कर लिया गया। इंजेक्शन लगने के कुछ ही समय बाद बच्चे की हालत तेजी से बिगड़ने लगी और उसे तत्काल गहन चिकित्सा इकाई में शिफ्ट करना पड़ा।
जांच रिपोर्ट में लापरवाही की पुष्टि
अस्पताल की आंतरिक जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया कि बच्चे की मौत का कारण शरीर में फॉर्मेलिन का पहुंचना था। रिपोर्ट में संबंधित नर्सिंग कर्मियों की लापरवाही को घटना के लिए जिम्मेदार माना गया है। इसके बाद पुलिस ने जांच रिपोर्ट के आधार पर कानूनी कार्रवाई शुरू की।
दो नर्सिंग कर्मियों पर दर्ज हुआ मामला
मामले में दो नर्सिंग अधिकारियों के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत FIR दर्ज की गई है। पुलिस का कहना है कि पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जांच जारी है और सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए आगे की कार्रवाई की जाएगी। घटना के बाद चिकित्सा संस्थानों में सुरक्षा प्रोटोकॉल और दवा प्रबंधन व्यवस्था को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है।