NEET पेपर लीक विवाद और छात्र आंदोलन को लेकर राजधानी भोपाल में राजनीतिक माहौल गरमा गया है। दिल्ली में छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई और विपक्षी नेताओं की गिरफ्तारी के विरोध में कांग्रेस कार्यकर्ता सड़कों पर उतर आए हैं। जिला कांग्रेस कमेटी के नेतृत्व में भाजपा प्रदेश कार्यालय तक पैदल मार्च निकाला जा रहा है। प्रदर्शन के दौरान शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, छात्रों पर दर्ज मामलों को वापस लेने और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग जोर-शोर से उठ रही है।
दिल्ली से भोपाल तक पहुंचा छात्र आंदोलन का असर
दिल्ली में NEET पेपर लीक को लेकर जारी छात्र आंदोलन का असर अब मध्य प्रदेश की राजनीति में भी दिखाई दे रहा है। राजधानी भोपाल में कांग्रेस कार्यकर्ता भाजपा प्रदेश कार्यालय की ओर मार्च निकालकर केंद्र सरकार के खिलाफ विरोध दर्ज करा रहे हैं। इससे पहले भाजपा ने भी प्रदेश कांग्रेस कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया था, जिसके बाद दोनों दलों के बीच राजनीतिक तल्खी और बढ़ गई है।
शिक्षा व्यवस्था और छात्र हितों को लेकर सरकार पर निशाना
कांग्रेस का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता लगातार सवालों के घेरे में है। प्रदर्शन के दौरान नेताओं ने परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करने, कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच और जवाबदेही तय करने की मांग उठाई। साथ ही केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को भी प्रमुख मुद्दा बनाया गया।
छात्रों पर दर्ज मामलों को वापस लेने की मांग तेज
प्रदर्शन में शामिल नेताओं ने दिल्ली में छात्र आंदोलन के दौरान दर्ज एफआईआर और अन्य कानूनी कार्रवाई वापस लेने की मांग दोहराई। उनका कहना है कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने वाले छात्रों के खिलाफ कार्रवाई उचित नहीं है। मार्च के दौरान छात्र अधिकारों और शिक्षा सुधार के समर्थन में नारेबाजी भी की जा रही है।
भोपाल में बढ़ी राजनीतिक हलचल
राजधानी भोपाल में कांग्रेस और भाजपा के आमने-सामने आने से राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया है। एक ओर कांग्रेस छात्र हितों और परीक्षा प्रणाली को मुद्दा बनाकर सरकार पर दबाव बना रही है, वहीं भाजपा भी कांग्रेस के आरोपों का जवाब देने में सक्रिय है। ऐसे में यह मुद्दा अब केवल छात्र आंदोलन तक सीमित नहीं रहकर प्रदेश की राजनीति का प्रमुख विषय बन गया है।