Digital Arrest Cyber Crime---भोपाल में साइबर ठगी का ऐसा मामला सामने आया है, जिसने डिजिटल अरेस्ट के बढ़ते खतरे को फिर उजागर कर दिया है। कोलार इलाके में साइबर ठगों ने एक बुजुर्ग दंपत्ति को करीब 97 दिनों तक डर और दबाव में रखा। आरोपियों ने खुद को जांच एजेंसियों और न्यायपालिका से जुड़ा अधिकारी बताकर दंपत्ति को कानूनी कार्रवाई का डर दिखाया। इसी बहाने उनसे 22 लाख रुपये से अधिक की रकम ठग ली गई। मामले का खुलासा उनकी बेटी की सतर्कता से हुआ।
जांच एजेंसियों का नाम लेकर बनाया दबाव
पीड़ित दंपत्ति के पास फोन करने वाले आरोपियों ने खुद को प्रवर्तन निदेशालय, दिल्ली पुलिस और सुप्रीम कोर्ट से जुड़ा अधिकारी बताया। उन्हें कथित तौर पर बड़े पैमाने पर अवैध लेनदेन और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में फंसने की बात कही गई। गिरफ्तारी और जेल भेजने की धमकी देकर आरोपियों ने बुजुर्ग दंपत्ति पर लगातार मानसिक दबाव बनाए रखा।
97 दिनों तक घर में ही रहने को किया मजबूर
ठगों ने दंपत्ति को इस कदर डरा दिया कि वे करीब 97 दिनों तक उनके निर्देशों का पालन करते रहे। उन्हें घर से बाहर निकलने और किसी रिश्तेदार या परिचित को जानकारी देने से भी रोका गया। लगातार फोन कॉल और पूछताछ के जरिए आरोपियों ने दंपत्ति को यह विश्वास दिलाने की कोशिश की कि वे एक गंभीर कानूनी मामले में फंस चुके हैं।
22 लाख रुपये से ज्यादा की रकम ऐंठी
डर का फायदा उठाकर साइबर ठगों ने बुजुर्ग दंपत्ति से 22 लाख रुपये से अधिक की रकम अपने बताए खातों में ट्रांसफर करा ली। आरोपियों ने कथित जांच और कानूनी प्रक्रिया का हवाला देकर दंपत्ति पर भुगतान का दबाव बनाया। लंबे समय तक चले इस पूरे घटनाक्रम में दंपत्ति मानसिक रूप से बेहद परेशान रहे।
बेटी को हुआ शक तो खुला पूरा मामला
दंपत्ति की बेटी ने उनके व्यवहार में अचानक आए बदलाव और असामान्य गतिविधियों को नोटिस किया। उसे शक हुआ तो उसने माता-पिता से जानकारी लेने की कोशिश की और मामले की पड़ताल शुरू की। इसके बाद सामने आया कि दोनों लंबे समय से साइबर ठगों के संपर्क में थे। बेटी की सूझबूझ से ठगी का यह मामला सामने आया और परिवार ने पुलिस से संपर्क किया।
पुलिस ने दर्ज किया मामला, जांच जारी
मामले की जानकारी मिलने के बाद परिजन कोलार थाने पहुंचे और शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर आरोपियों की पहचान और तलाश शुरू कर दी है। यह घटना एक बार फिर बताती है कि फोन पर कोई व्यक्ति खुद को पुलिस, जांच एजेंसी या अदालत का अधिकारी बताकर धमकाए तो घबराकर पैसे ट्रांसफर नहीं करने चाहिए। ऐसी स्थिति में तुरंत परिवार और पुलिस को जानकारी देना सबसे जरूरी है।