दिवाली के त्योहार से पहले मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में एक बार फिर बजरंग दल का अनोखा अभियान चर्चा में है। शहर की दीवारों और चौराहों पर “अपना त्योहार अपनों से व्यवहार” के पोस्टर्स लगाए गए हैं, जिनमें लोगों से अपील की गई है कि वे दीपावली की खरीदारी केवल उन्हीं से करें, जो “आपकी खरीदारी से अपनी दीपावली मना सकें।” इस संदेश के साथ संगठन ने सनातनी व्यापारियों से व्यवहार को प्रोत्साहित करने की मुहिम छेड़ दी है।
भोपाल में दिखे नए पोस्टर्स की लहर
राजधानी भोपाल के कई इलाकों—रत्नागिरी चौराहा, न्यू मार्केट, अरेरा कॉलोनी और कोलार रोड—में “अपना त्योहार अपनों से व्यवहार” के पोस्टर्स लगाए गए हैं। बैनर पर साफ लिखा है कि दीपावली की खरीदारी उन्हीं दुकानदारों से करें, जो सनातन धर्म के अनुयायी हैं और इस पवित्र त्योहार को श्रद्धा से मनाते हैं। संगठन का कहना है कि इसका उद्देश्य छोटे हिंदू दुकानदारों, कारीगरों और मिठाई विक्रेताओं को आर्थिक सहयोग देना है ताकि हर घर में दीपावली का दीप जल सके।
‘जो त्योहार मानता है, उसी से व्यापार’
बजरंग दल ने अपनी आंतरिक बैठक में यह निर्णय लिया कि दीपावली की खरीदारी उन्हीं से होगी जो सनातनी परंपराओं में विश्वास रखते हैं। संगठन का तर्क है कि यह कदम ‘स्वदेशी व्यवहार’ और ‘सांस्कृतिक आत्मनिर्भरता’ को बढ़ावा देता है। पटाखों से लेकर ज्वैलरी, दीये से लेकर मिठाई तक—सभी सामान उन्हीं विक्रेताओं से खरीदने का संदेश दिया गया है जो स्वयं दीपावली का उत्सव मनाते हैं।
राजनीतिक गलियारों में मचा शोर
इस पहल को लेकर सियासी बयानबाजी भी तेज हो गई है। एक ओर इसे “आर्थिक राष्ट्रवाद और स्वदेशी व्यापार” को प्रोत्साहित करने वाला कदम बताया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर इसे सांप्रदायिक सौहार्द को प्रभावित करने वाला कहा जा रहा है। समर्थक इसे ‘धार्मिक पहचान के सम्मान’ से जोड़ रहे हैं, जबकि विपक्ष का मानना है कि त्योहार लोगों को जोड़ने का माध्यम है, बांटने का नहीं।
दीवाली की रौनक और स्थानीय व्यापार का संगम
जैसे-जैसे दीपावली करीब आ रही है, शहर की मार्केटें रंग-बिरंगी रोशनी से जगमगा रही हैं। पोस्टर्स की इस मुहिम ने त्योहार की तैयारियों को सामाजिक और सांस्कृतिक विमर्श से जोड़ दिया है। फिलहाल लोग इस संदेश को अपने-अपने नजरिए से देख रहे हैं—किसी के लिए ये ‘अपनों की मदद’ है, तो किसी के लिए ‘धर्म आधारित व्यापार का नया अध्याय’।