भोपाल में बुधवार को किसानों का आंदोलन तेज हो गया है। नर्मदापुरम और आसपास के जिलों से पहुंचे किसान मुख्यमंत्री आवास की ओर मार्च करने की तैयारी में हैं। किसानों की मुख्य मांग मूंग की 100 फीसदी खरीदी और खाद वितरण व्यवस्था में बदलाव की है। किसानों का कहना है कि जिला स्तर पर 25 दिन तक आंदोलन के बावजूद उनकी बात नहीं सुनी गई, इसलिए अब राजधानी में सरकार के सामने अपनी मांग रखने का फैसला किया है।
25 दिन जिला मुख्यालयों पर आंदोलन, अब भोपाल में डेरा
किसानों का कहना है कि भोपाल पहुंचने से पहले वे करीब 25 दिनों तक अलग-अलग जिला मुख्यालयों पर धरना दे रहे थे। उनका आरोप है कि स्थानीय प्रशासन और सरकार की ओर से उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया गया। इसके बाद नर्मदापुरम समेत आसपास के करीब 12 जिलों के किसान राजधानी की ओर रवाना हुए। मंगलवार देर रात करीब 500 प्रदर्शनकारी किसानों के भोपाल पहुंचने की बात सामने आई है।
दो मांगों पर सबसे ज्यादा जोर
किसानों की ओर से कुल आठ मांगें रखे जाने की बात कही जा रही है, लेकिन सरकार के सामने बातचीत में दो मांगों को सबसे अहम बताया गया है। पहली मांग है कि मूंग की पूरी उपज की सरकारी खरीद की जाए। दूसरी मांग खाद वितरण में लागू टोकन व्यवस्था को खत्म करने की है। किसानों का कहना है कि इन दोनों मुद्दों पर जल्द समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन और बड़ा किया जाएगा।
मूंग की खेती बढ़ाने के बाद खरीदी से पीछे हटने का आरोप
प्रदर्शनकारी किसानों का आरोप है कि सरकार की नीतियों के कारण उन्होंने मूंग की खेती बढ़ाई, लेकिन अब फसल की पूरी खरीद नहीं होने से उन्हें नुकसान उठाना पड़ रहा है। किसानों के मुताबिक उन्हें करीब 10 से 12 हजार रुपये प्रति एकड़ तक नुकसान हो रहा है। उनका कहना है कि केंद्र और राज्य सरकार के बीच जिम्मेदारी तय करने की स्थिति में किसान परेशान हो रहा है।
आंदोलन में युवाओं की बड़ी मौजूदगी
इस बार के प्रदर्शन में युवा किसानों की भागीदारी भी दिखाई दे रही है। आंदोलनकारियों का दावा है कि यह प्रदर्शन पारंपरिक किसान आंदोलनों से अलग है और बड़ी संख्या में युवा तथा Gen-Z किसान इसमें शामिल हैं। प्रदर्शनकारी युवाओं ने कहा कि वे अपनी मांगों के लिए पीछे हटने वाले नहीं हैं और जरूरत पड़ने पर आंदोलन को और विस्तार दिया जाएगा।
कृषि मंत्री से बातचीत बेनतीजा, सड़क पर ही डाला डेरा
मंगलवार देर रात कृषि मंत्री एदल सिंह कंसाना के साथ किसानों के प्रतिनिधिमंडल की बातचीत हुई, लेकिन इसमें कोई समाधान नहीं निकल सका। इसके बाद किसान होशंगाबाद रोड पर पुलिस के आखिरी बैरियर के पास धरने पर बैठ गए। प्रशासन ने मौके पर पुलिस बल तैनात किया और किसानों से बातचीत की कोशिश की, लेकिन प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर अड़े रहे। रात में किसानों ने सड़क पर ही भोजन तैयार किया। उन्होंने आग जलाकर बाटी बनाई और टमाटर-मिर्च भूनकर भरता तैयार किया। किसानों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर फैसला नहीं होता, वे धरना खत्म नहीं करेंगे। जरूरत पड़ने पर लंबे समय तक आंदोलन जारी रखने के लिए राशन का इंतजाम करने की बात भी कही गई है।
किसान आंदोलन से ट्रैफिक पर असर, कई स्कूलों में छुट्टी
भोपाल में किसानों के प्रदर्शन के कारण कई इलाकों में यातायात प्रभावित हुआ है। प्रशासन ने ट्रैफिक को सामान्य रखने के लिए रूट डायवर्जन जारी किया है। नर्मदापुरम रोड से आने वाले वाहनों को 11 मील बाईपास, खजूरी कला, एसओएस रोड और पिपलानी की ओर से आवागमन की सलाह दी गई है। एमपी नगर से नर्मदापुरम रोड जाने वाले वाहन गोविंदपुरा, पिपलानी, पटेल नगर या खजूरी कला मार्ग का इस्तेमाल कर सकते हैं। एम्स की ओर जाने वाले लोगों के लिए कटराहिल्स, बागसेवनिया और आरएलएल ब्रिज के नीचे से जाने का विकल्प बताया गया है। आंदोलन के चलते भोपाल के कुछ स्कूलों में अवकाश घोषित किए जाने की भी जानकारी सामने आई है।