रथ पूरी तरह हाइड्रोलिक, पहली बार ओडिशा के नंदिघोष रथ की तर्ज पर डिजाइन
रूस से भी श्रद्धालु पहुंचे, जगह-जगह भंडारे, समापन पर आरती करेंगी मंत्री कृष्णा गौर
भोपाल। इस्कॉन भोपाल की 13वीं वार्षिक रथयात्रा शनिवार शाम शहर के प्रमुख मार्गों से निकली। भगवान श्रीजगन्नाथ, बलराम और देवी सुभद्रा की प्रतिमाएं 27 फीट ऊंचे भव्य रथ पर विराजमान थीं। यात्रा का शुभारंभ भोपाल टॉकीज से महापौर मालती राय ने किया। समापन माता मंदिर स्थित प्लेटिनम प्लाजा पर होगा, जहां प्रदेश सरकार की मंत्री कृष्णा गौर आरती में शामिल होंगी।
रथयात्रा हमीदिया रोड, भारत टॉकीज, रोशनपुरा, रंगमहल और न्यू मार्केट होते हुए आगे बढ़ी। यात्रा में हजारों श्रद्धालु शामिल हुए। विशेष बात यह रही कि इस बार रूस से भी भक्त यात्रा में भाग लेने भोपाल पहुंचे।
नंदिघोष की तर्ज पर बना भव्य रथ, सागौन की कारीगरी और हाइड्रोलिक तकनीक का संगम
इस बार इस्कॉन भोपाल की रथयात्रा में जिस रथ का उपयोग किया गया, वह पहली बार पुरी, उड़ीसा के प्रसिद्ध नंदिघोष रथ की शैली में तैयार किया गया है। पूरी तरह हाइड्रोलिक तकनीक से सुसज्जित यह रथ आवश्यकता अनुसार ऊंचा या नीचा किया जा सकता है। इसकी ऊंचाई 27 फीट, लंबाई 24 फीट और चौड़ाई 17 फीट है। रथ का ढांचा सागौन की 50 घन फीट लकड़ी से निर्मित है, जबकि इसका आधार दो टन लोहे से तैयार किया गया है, जो इसे अत्यंत मजबूत बनाता है। छह फीट ऊंचे लकड़ी के विशाल पहिए इसे पारंपरिक स्वरूप देते हैं। रथ की छत और बाहरी ढांचे को रंगीन वस्त्रों, घंटियों और सुंदर वास्तुशिल्पीय नक्काशी से सजाया गया है, जिससे यह न केवल श्रद्धा का केंद्र बना, बल्कि आकर्षण का भी विषय रहा।
रथयात्रा में भंडारे और प्रसाद की रही व्यापक व्यवस्था, हजारों भक्तों ने लिया लाभ
यात्रा मार्ग में जगह-जगह भक्तों के लिए भंडारे और प्रसाद वितरण की व्यवस्था की गई थी। इस दौरान करीब 500 किलो खाजा प्रसाद श्रद्धालुओं में वितरित किया गया। समापन स्थल पर 5000 से अधिक श्रद्धालुओं को देसी घी से बना हलवा प्रसाद दिया जा रहा है। वहीं, संध्या आरती के बाद महाप्रसाद का भव्य आयोजन किया गया है, जिसमें इस्कॉन द्वारा लगभग 5000 लोगों के भोजन की व्यवस्था की गई है। यह आयोजन न केवल धार्मिक भावनाओं से जुड़ा रहा, बल्कि भोपालवासियों के लिए एक सांस्कृतिक उत्सव जैसा भी महसूस हुआ।