भोपाल। राजधानी भोपाल के लोगों के लिए राहत और आधुनिकता से भरी खबर है। शहर में लंबे समय से प्रतीक्षित मेट्रो रेल सेवा का संचालन अब अंतिम चरण में है और
सितंबर 2025 तक इसकी शुरुआत की संभावना है। यह मेट्रो सिस्टम न सिर्फ शहर की रफ्तार बढ़ाएगा, बल्कि पब्लिक ट्रांसपोर्ट के तौर-तरीकों में भी बड़ा बदलाव
लाएगा। लेकिन मेट्रो को सफल बनाने के लिए किराया और रूट प्लानिंग जैसी कई चुनौतियां भी सामने हैं।
किराया तय करेगा मेट्रो की सफलता
विशेषज्ञों का मानना है कि मेट्रो सेवा को आम जनता के लिए उपयोगी और व्यवहारिक बनाना बेहद जरूरी है। यदि किराया शहर की मौजूदा बस या ऑटो सेवा से कहीं अधिक हुआ, तो इसकी लोकप्रियता पर असर पड़ेगा। इसके अलावा, अगर लोग अपने घर से मेट्रो स्टेशन तक पहुंचने के लिए अलग से साधन का उपयोग करते हैं, तो यह यात्रा महंगी और असुविधाजनक बन सकती है।
इंदौर मेट्रो से मिले संकेत
इंदौर मेट्रो के अनुभवों ने साफ कर दिया है कि जैसे-जैसे किराया बढ़ा, वैसे-वैसे यात्रियों की संख्या में गिरावट आई। यही चिंता अब भोपाल मेट्रो को लेकर भी जताई जा रही है। अगर मेट्रो महंगी पड़ी, तो यह आम जरूरत के लिए उपयोग में नहीं आएगी। इसके लिए कम किराए और बेहतर कनेक्टिविटी की जरूरत है, ताकि नियमित यात्री बनाए जा सकें।
शुरुआती चरण में एम्स से सुभाष नगर तक संचालन
भोपाल मेट्रो के पहले चरण में एम्स से सुभाष नगर तक मेट्रो चलाई जाएगी। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि यह रूट ज्यादा व्यावहारिक नहीं है। यदि लाइन एयरपोर्ट, सिटी सेंटर, करोद या रेलवे स्टेशन जैसे व्यस्त क्षेत्रों से जुड़ती, तो यात्रियों की संख्या में इजाफा होता। वर्तमान रूट से केवल रेलवे स्टेशन आने-जाने वाले मरीजों और उनके परिजनों को सुविधा होगी।
किराए की तुलना में महंगी साबित हो सकती है यात्रा
जानकारों के मुताबिक, भोपाल मेट्रो का संभावित किराया 40 रुपये तक हो सकता है, जो प्रति किलोमीटर लगभग 5 रुपये बनता है। जबकि शहर में चलने वाली लो-फ्लोर बसें 16 किलोमीटर की दूरी मात्र 20 रुपये में तय कराती हैं। इसी वजह से मेट्रो यात्रा आर्थिक रूप से कुछ महंगी पड़ सकती है। इसलिए जरूरी है कि किराए को तर्कसंगत रखा जाए और इसे बस व रिक्शा जैसे अन्य साधनों से जोड़ा जाए।
इंटीग्रेटेड
ट्रांसपोर्ट सिस्टम पर जोर
मेट्रो प्रबंधन की मानें तो शहर में इंटीग्रेटेड ट्रांसपोर्ट सिस्टम तैयार किया जा रहा है, जिसमें मेट्रो, बस और अन्य लोक परिवहन साधनों को जोड़ने का प्रयास है। इससे मेट्रो स्टेशन तक आसानी से पहुंचना संभव हो सकेगा। भविष्य में मेट्रो का विस्तार शहर के अन्य इलाकों तक भी किया जाएगा, जिससे ज्यादा से ज्यादा लोग इसका लाभ उठा सकें।
इंदौर मेट्रो का मॉडल
फिलहाल इंदौर में मेट्रो सेवा गांधी नगर से सुपर कॉरिडोर-03 तक पांच स्टेशनों पर चल रही है। वहां न्यूनतम किराया 20 रुपये और अधिकतम 30 रुपये रखा गया है। संचालन सुबह 8 बजे से रात 8 बजे तक हर 30 मिनट पर किया जा रहा है। शुरुआत में इसे नि:शुल्क रखा गया था, लेकिन अब चरणबद्ध तरीके से किराया लागू किया जा रहा है।