भोपाल के लोगों का लंबे समय से इंतजार अब खत्म होने वाला है। राजधानी में मेट्रो की पहली ट्रेन नवंबर के आखिर तक पटरी पर दौड़ सकती है। मेट्रो रेल सुरक्षा आयुक्त (सीएमआरएस) की टीम निरीक्षण में जुटी है और सभी रिपोर्ट सही मिली तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसके कमर्शियल संचालन को हरी झंडी दिखा सकते हैं। शहर में ट्रैफिक जाम से राहत का नया अध्याय शुरू होने वाला है।
सीएमआरएस टीम ने संभाला निरीक्षण का मोर्चा
भोपाल में मेट्रो प्रोजेक्ट की रफ्तार अब अपने अंतिम चरण में है। मेट्रो रेल सुरक्षा आयुक्त जनक कुमार गर्ग की टीम ने एम्स से सुभाषनगर तक ट्रैक, स्टेशन और सुरक्षा इंतजामों का निरीक्षण शुरू कर दिया है। यह निरीक्षण बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि इसी रिपोर्ट के आधार पर मेट्रो के कमर्शियल संचालन की अनुमति तय होगी।
टीम इससे पहले भी दो बार मेट्रो कॉरिडोर का दौरा कर चुकी है, जहां सुभाषनगर डिपो और 6.22 किलोमीटर लंबे प्राथमिकता कॉरिडोर की जांच की गई थी। इस बार का निरीक्षण अंतिम है, जिसके बाद सुरक्षा और तकनीकी मंजूरी रिपोर्ट मेट्रो कॉरपोरेशन को सौंपी जाएगी।
नवंबर के आखिर तक शुरू हो सकता है संचालन
मेट्रो अधिकारियों के मुताबिक, सभी जरूरी कार्य लगभग पूरे हो चुके हैं। एम्स, डीबी मॉल, सुभाषनगर, रानी कमलापति समेत आठ स्टेशनों पर फिनिशिंग टच दिया जा रहा है। केवल केंद्रीय स्कूल स्टेशन के पास सड़क खुदाई का काम जारी है। बाकी स्टेशनों पर आंतरिक और बाहरी निर्माण लगभग पूरा है।
अगर निरीक्षण में सबकुछ ठीक रहा तो नवंबर के आखिरी सप्ताह तक मेट्रो का उद्घाटन संभव है। पीएम मोदी भोपाल आकर इस ऐतिहासिक प्रोजेक्ट की शुरुआत कर सकते हैं।
16 किलोमीटर का पहला कॉरिडोर होगा शुरू
भोपाल मेट्रो का पहला कॉरिडोर एम्स से करोंद तक 16.05 किलोमीटर लंबा है। यह कॉरिडोर शहर के सबसे व्यस्त मार्गों को जोड़ता है, जिससे रोजाना लाखों लोगों को राहत मिलेगी। अधिकारियों का कहना है कि प्रारंभिक संचालन के साथ ही समानांतर रूप से बाकी कार्य भी चलते रहेंगे ताकि पूरे रूट को शीघ्र चालू किया जा सके।
जाम से राहत और आधुनिक परिवहन की नई पहचान
मेट्रो के शुरू होने से शहर के लोगों को ट्रैफिक जाम और प्रदूषण से राहत मिलेगी। यह भोपाल को स्मार्ट सिटी के रूप में नई पहचान देगा। साथ ही, मेट्रो शहर के दक्षिण और उत्तर हिस्सों को जोड़ते हुए लोगों की यात्रा को तेज, सुरक्षित और सुविधाजनक बनाएगी।