भोपाल में पांच साल की मासूम बच्ची से दुष्कर्म और हत्या के मामले में न्याय व्यवस्था ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने निचली अदालत द्वारा सुनाई गई तिहरी फांसी की सजा को बरकरार रखते हुए आरोपी की अपील खारिज कर दी। अदालत ने इसे “विरलतम से विरलतम” अपराध मानते हुए कहा कि ऐसे जघन्य कृत्य किसी भी तरह की रियायत के योग्य नहीं हैं।
हाईकोर्ट का फैसला: फांसी की सजा कायम
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की खंडपीठ ने पॉक्सो विशेष अदालत के 10 मार्च 2025 के आदेश को सही ठहराया। न्यायालय ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि आरोपी का कृत्य अमानवीय, बर्बर और समाज की अंतरात्मा को झकझोर देने वाला है। इसी आधार पर तीन अलग-अलग अपराधों—अपहरण, बलात्कार और हत्या—के लिए दी गई तिहरी मृत्युदंड की सजा को बरकरार रखा गया।
कैसे हुआ था अपराध: टंकी में मिला था शव
यह मामला भोपाल के शाहजहानाबाद थाना क्षेत्र का है। 24 सितंबर 2024 को बच्ची अपनी दादी के साथ थी और किताब लाने के लिए पास के फ्लैट में भेजी गई थी। इसके बाद वह लापता हो गई। पुलिस तलाश में जुटी और दो दिन बाद आरोपी के घर पानी की प्लास्टिक टंकी से उसका शव बरामद हुआ, जिससे पूरे इलाके में सनसनी फैल गई।
निचली अदालत का कड़ा रुख
विशेष अदालत ने फैसला सुनाते समय इसे “रेयरेस्ट ऑफ रेयर” की श्रेणी में रखा था। न्यायाधीश ने टिप्पणी की थी कि यदि मृत्युदंड से भी कठोर कोई सजा कानून में उपलब्ध होती, तो वही दी जाती। यह मामला भारतीय न्याय संहिता के तहत राज्य में तिहरे मृत्युदंड के शुरुआती उदाहरणों में शामिल माना गया।
परिजनों पर भी कार्रवाई
अदालत ने आरोपी को दोहरे आजीवन कारावास की अतिरिक्त सजा भी सुनाई। साथ ही उसकी मां और बहन को सबूत छिपाने के आरोप में दोषी ठहराते हुए दो-दो साल की कैद दी गई। न्यायालय ने कहा कि अपराध के बाद साक्ष्य मिटाने का प्रयास भी कानून की नजर में गंभीर अपराध है।
न्याय व्यवस्था का सख्त संदेश
हाईकोर्ट के इस फैसले को महिला और बाल सुरक्षा के मामलों में एक कड़ा संदेश माना जा रहा है। अदालत ने साफ किया कि समाज में भयावह अपराधों को रोकने के लिए कठोर दंड जरूरी है। यह निर्णय न केवल पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की दिशा में अहम कदम है, बल्कि भविष्य में ऐसे अपराधों पर अंकुश लगाने का प्रयास भी माना जा रहा है।