भोपाल में परिवार से नाराज होकर घर छोड़ने वाली दो नाबालिग बहनों का मामला मानव तस्करी के संगठित नेटवर्क की गंभीर तस्वीर सामने लाता है। रेलवे स्टेशन से बहला-फुसलाकर ले जाई गई दोनों किशोरियों को अलग-अलग स्थानों पर रखा गया और उन्हें झूठे सपने दिखाकर मानसिक रूप से प्रभावित करने की कोशिश की गई। पुलिस जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर अब इस मामले में चालान पेश किए जाने की तैयारी है।
रेलवे स्टेशन से शुरू हुआ पूरा घटनाक्रम
यह मामला नवंबर 2024 का है। भोपाल के हनुमानगंज क्षेत्र की 13 और 15 वर्षीय दो सगी बहनें परिवार से नाराज होकर घर से निकल गई थीं। दोनों भोपाल रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर-6 पर ट्रेन का इंतजार कर रही थीं। इसी दौरान एक युवक ने उनसे बातचीत शुरू की और मदद करने का भरोसा दिलाया। कुछ देर बाद वह दोनों को स्टेशन से बाहर ले गया, जहां पहले से वाहन मौजूद था। थोड़ी दूरी पर पहुंचने के बाद दोनों बहनों को अलग-अलग वाहनों में बैठाकर अलग-अलग स्थानों पर भेज दिया गया।
सीसीटीवी फुटेज बना जांच का अहम आधार
परिजनों की शिकायत के बाद पुलिस ने रेलवे स्टेशन और आसपास के इलाकों के सीसीटीवी फुटेज की जांच की। फुटेज में दोनों किशोरियां एक संदिग्ध युवक के साथ दिखाई दीं। इसी सुराग के आधार पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए पहले शिवपुरी से छोटी बहन और बाद में गुना से बड़ी बहन को सुरक्षित बरामद किया। मामले की जांच के दौरान पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाई। जानकारी के अनुसार, इस मामले में 18 जुलाई को न्यायालय में चालान पेश किया जाना प्रस्तावित है।
जांच में सामने आया तस्करी का तरीका
पुलिस जांच के अनुसार, आरोपियों का गिरोह रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड जैसे स्थानों पर घर से भटके या अकेले मिले नाबालिग बच्चों और किशोरियों पर नजर रखता था। गिरोह में कुछ महिलाएं भी शामिल थीं, जो भरोसा जीतने के लिए अपने व्यवहार से अपनापन जताती थीं। इसके बाद किशोरियों को बेहतर जीवन, शादी या सुरक्षित भविष्य जैसे झूठे वादों के जरिए अपने साथ ले जाया जाता था। जांच में यह भी सामने आया कि दोनों बहनों को अलग-अलग स्थानों पर रखकर उन पर मानसिक दबाव बनाया गया और उन्हें अपनी इच्छा के विरुद्ध संबंध निभाने के लिए मजबूर किया गया।
अन्य राज्यों तक फैले नेटवर्क की भी जांच
पूछताछ के दौरान पुलिस को ऐसे संकेत मिले हैं कि यह नेटवर्क केवल एक जिले तक सीमित नहीं था। जांच में यह तथ्य भी सामने आया कि गिरोह अन्य जिलों से भी नाबालिग लड़कियों को इसी तरह अपने जाल में फंसाने का प्रयास करता था और उन्हें बड़े शहरों तक ले जाने की तैयारी करता था। पुलिस इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है।
बढ़ते गुमशुदगी के मामलों ने बढ़ाई चिंता
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, भोपाल में हर महीने औसतन 50 से 60 लड़कियों के लापता होने के मामले दर्ज हो रहे हैं। इस वर्ष के शुरुआती छह महीनों में यह संख्या एक हजार से अधिक बताई गई है। विभिन्न अभियानों के दौरान पुलिस ने 200 से ज्यादा लड़कियों को खोज निकाला है, जबकि कई मामलों में तलाश अभी भी जारी है। प्रदेश स्तर पर भी बड़ी संख्या में लापता बेटियों का रेस्क्यू किया जा चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में परिवार, समाज और संबंधित एजेंसियों के बीच सतर्कता और समय पर सूचना साझा करना बेहद महत्वपूर्ण है।