भोपाल रियासत की करोड़ों की संपत्ति को लेकर 25 साल से चला आ रहा वारिसी विवाद अब फिर कोर्ट की चौखट पर लौट आया है। हाईकोर्ट के निर्देश पर ट्रायल कोर्ट में नए सिरे से सुनवाई होगी, जिसमें अभिनेता सैफ अली खान और नवाब हमीदुल्ला खान के भाई
की वंशज बेगम सुरैया आमने-सामने होंगे। यह फैसला नवाब मोहम्मद हमीदुल्ला खान की निजी संपत्तियों के असली वारिस को लेकर बेहद अहम है।
25 साल पुराने फैसले को कोर्ट ने माना दोषपूर्ण
भोपाल रियासत के अंतिम नवाब मोहम्मद हमीदुल्ला खान की निजी संपत्तियों को लेकर चला आ रहा विवाद अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। हाईकोर्ट ने 14 फरवरी 2000 को दिए गए ट्रायल कोर्ट के आदेश को खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि संपत्तियों का हस्तांतरण केवल सिंहासन के उत्तराधिकार से नहीं जुड़ा है, बल्कि उसे व्यक्तिगत उत्तराधिकार कानूनों के तहत देखा जाएगा।
वारिसी
का दावा: संपत्ति सभी कानूनी वारिसों
की है
अपील बेगम सुरैया, कमरताज राबिया सुल्तान सहित नवाब हमीदुल्ला के बड़े भाई के अन्य वंशजों ने दाखिल की थी। उनका दावा है कि नवाब की संपत्ति पर सिर्फ सैफ अली खान या उनके परिजनों का ही नहीं, बल्कि सभी वैध उत्तराधिकारियों का हक है। उन्होंने ट्रायल कोर्ट के पहले के फैसले को गलत ठहराते हुए इसे चुनौती दी थी।
सैफ अली खान, शर्मीला टैगोर भी पक्षकार
इस मामले में पूर्व क्रिकेटर नवाब मंसूर अली खान पटौदी, उनकी पत्नी शर्मीला टैगोर, बेटे सैफ अली खान और बेटियां सबा व सोहा अली खान को भी पक्षकार बनाया गया है। यह सभी भोपाल नवाब की निजी संपत्ति पर अपने उत्तराधिकार का दावा कर रहे हैं।
एक साल में ट्रायल कोर्ट को देना होगा फैसला
हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिए हैं कि वह इस विवाद की सुनवाई एक वर्ष की समयावधि में पूरी करे और अंतिम निर्णय सुनाए। अब अदालत तय करेगी कि नवाब हमीदुल्ला की करोड़ों की संपत्ति का असली हकदार कौन है—सैफ अली खान का परिवार या नवाब के भाई की वंशज बेगम सुरैया।